Monday, September 9, 2013

" श्री श्वेतार्क गणपति '


........... श्री मन्महा गणाधिपतये नम: ...........
..... हे गणपति ! आपका हम स्वकार्य सिद्धि हेतु आव्हान करते हैं. आप सबकी प्रार्थना सुनने वाले हैं. जितने संसार के गण हैं आप सबके स्वामी हैं . विद्वानों के भी आप विद्वान् हैं. आप सब ब्रह्मवेत्ताओं में ज्येष्ठ हैं. आप हमारे ह्रदय रूपी आसन में आकर विराजमान हो....
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.....भगवान् गजानन की मान्यता भारतवर्ष में प्राचीन समय से चली आ रही है , स्मार्त (गृहस्थ ) उपासना में भी श्री गणेश जी की गणना की जाती है . यजुर्वेद में भी ' गणानान्त्वा गणपति हवामहे ...' इत्यादि मन्त्र में गणपति का अर्थ ग्रहण किया गया है , यद्यपि वेद भाष्यकार ' उव्वट महीधर ' ने इस मन्त्र का अर्थ प्रकरणानुसार अश्व किया है , तथापि ' यास्क मुनि ' के कथनानुसार तप से वेद मन्त्रों के अनेकार्थ हो जाते हैं . ऐसा सिद्धांत होने से गणपतिपरक अर्थ की संभावना में कोई संदेह नहीं किया जा सकता .
..... अवैदिक जैन पंथ और बौद्ध पंथ में भी गणेश की मान्यता को स्वीकार किया गया है .
..... बहुत से लोगो का मानना है कि गणेश पूजा अनार्यों से आर्यों में आयी , यह कथन सर्वथा अप्रामाणिक है .
..... नेपाल, तिब्बत , कम्बोडिया , जापान , चीन , मंगोल आदि देशों में भी गणेश प्रतिमाएं मिली है , जिससे गणेश उपासना की व्यापकता सिद्ध होती है , और गणेश का वैज्ञानिक रूप व उपासना क्रम भारतवर्ष से ही इन देशों में गया है , क्योंकि ' मनु जी ' ने कहा है कि ...
..... एतद्देश प्रसूतस्य सकाशादग्रजन्मन:| स्वं स्वं चरित्रं शिक्षेरंपृथिव्याम सर्व मानवा:||
..... इस देश में पैदा हुए अग्रजन्मा के द्वारा ही संसार के सभी देशों के लोगों ने ज्ञान प्राप्त किया है. इसलिए इस गणेश विज्ञान को अनार्यों से सीखने का कोई प्रमाण नहीं है ...
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----- महाकवि कालीदास ने ' चिदगगन चन्द्रिका ' में श्री गणेश जी के आविर्भाव के सम्बन्ध में लिखा है ......
..... सर्वप्रथम चिद्शक्ति से स्फुरित होता हुआ क्षीर समुद्र पौर्णमासी चन्द्र के समान जो निस्तरंग स्फुरित हो रहा है , जहां कि इस चिद्व्योम में नादतत्व का फैलाव हो रहा है , जो तेजोमयी बिन्दुमाला धारण किये हुए हैं , आदि शिवशक्ति का स्पंद जिनका स्वरुप है , ॐ कार रूपी शुण्ड से जिनकी क्रियाशक्ति प्रकट हो रही है , दन्त जिनके मुख से निकला हुआ है , शक्ति से उत्पन्न होने वाले जो गणेश है वे हमारे क्लेशों को दूर करें...
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..... आप सभी मित्रों के लिए यहाँ पर " श्री श्वेतार्क गणपति ' की दो दुर्लभ प्रतिमाएं दर्शनार्थ प्रस्तुत कर रहा हूँ , इसमें से एक प्रतिमा में अभिमंत्रित होते समय ही एक ' नागदेव' आकर लिपट गए थे ...मानो आदिदेव महादेव ने स्वयं अपने गण को आशीर्वाद देने भेज दिया हो....दर्शन लाभ करें ...श्री महागणपति आपकी मनोकामनाएं पूर्ण करें...
..... आपका ' विजय '

Saturday, September 7, 2013

यह कितनी विडम्बना है ...

..... मेरे आत्मीय मित्रों ! जय महाशक्ति ...
..... आज आपसे एक बहुत गंभीर चर्चा करने जा रहा हूँ , पिछले कुछ वर्षों से धर्म और ज्योतिष के क्षेत्र में कुछ ऐसा बदलाव आया है जिसके कारण इन विषयों से आम जनमानस का विश्वास कम होने लगा है ...
..... अक्सर फेसबुक पर भी यन्त्र , मंत्र , तंत्र , ज्योतिष , पराविज्ञान , काला जादू , लालकिताब , रावण संहिता , भृगुसंहिता आदि अत्यंत गूढ़ विषयों पर भी आधी अधूरी जानकारी देखने को मिलती है....
..... भूत , प्रेत , पिशाच , जिन्न , चुड़ैल , बैताल , ब्रह्म राक्षस , योगिनी , डाकिनी , शाकिनी आदि के विषय में भी भ्रान्तिपरक बातें आम जन जीवन में सुनने देखने को मिलती है . इन्हीं बातो को हौव्वा बना कर आम जनमानस को डरा कर उसका शोषण करने का सर्वत्र प्रयास होता रहता है ....जबकि इसकी हकीकत कुछ और है ....
..... यद्यपि इस तरह का कार्य करने वाले इन विषयों के कदापि जानकार नहीं होते , किन्तु फिर भी अपने वाणी और क्रियाकलापों से ऐसे लोग आम जनमानस का शोषण करने में कामयाब हो ही जाते है ....
..... कुछ बड़े बाबा टाइप जीवधारी भी काला जादू , या तंत्र मन्त्र की आड़ में अपना वर्चस्व बनाने में कामयाब होते है ...
..... एक दिन ' श्री पुष्कर व्यास जी' ने एक प्रश्न फेसबुक पर किया था कि , ' बृहस्पति ' का एक नाम ' जीव' भी है , यह नाम कैसे और कब पडा , इस प्रश्न के उत्तर कई ज्योतिषी बंधुओं ने स्वविवेक से दिए , किन्तु उनमें से एक भी उत्तर सही नहीं था ....? यह कितनी विडम्बना है ...
..... अब ऐसे में प्रश्न यह उठता है कि इस आभासीय और वास्तविक जगत में यह कैसे जाना जाय कि जो ज्योतिषीगण इसका व्यावसायिक उपयोग कर रहे हैं , उन्हें ज्योतिष जैसे गूढ़ विषय का वास्तविक ज्ञान है भी या नहीं ...
..... जिन मन्त्रों के विषय में लिख रहे है उन मन्त्रों का वैज्ञानिक रूप क्या है , और वह कौन सी विधियां है जिनसे मन्त्र प्रभावशाली हो कर अपना असर दिखाते हैं...क्या हर मन्त्र हर व्यक्ति को लाभ करेगा ? क्या इसका कोई रास्ता निकाला जा सकता है ...? क्या किसी पुस्तक से पढ़कर इन मन्त्रों का प्रयोग किया जाना उचित है ? बहुत से प्रश्न है ...यह एक महत्वपूर्ण विषय है ....
..... ..... सोशल मीडिया अब काफी ताकतवर हो चुका है , मैं सोच रहा हूँ कि इसी के जरिये मैं आम जनमानस और अपने मित्रों को इन विषयों की वास्तविकता बताऊँ , ताकि वे किसी के द्वारा गुमराह न किये जा सके , और अपने उत्थान के लिए स्वत: वे ऐसे आसान उपाय और उनकी विधियां जान सके , जिससे वास्तव में उनके जीवन में सही मार्गदर्शन हो सके ...और वह अपना आत्मिक , मानसिक , आर्थिक उत्थान स्वयं कर सकें ...
..... मेरे आत्मीय मित्रों क्या उचित रहेगा ? क्या मुझे ऐसा करना चाहिए...? आपकी क्या सलाह है ....?

Tuesday, September 3, 2013

......... महापुराण .........

..... मेरे आत्मीय बंधुओं ! यथोचित अभिवादन ...
..... फेस बुक पर बहुत समय से यह विवाद चला आ रहा है कि ' विष्णु ( श्री मद्भागवत ) भागवत महा पुराण है या देवी भागवत ...? वैष्णव श्री मद्भागवत को महापुराण और शाक्त देवी भागवत को महापुराण मानते है ... दोनों में एक के मत से एक महापुराण और दूसरा उप पुराण है ...वास्तव में पुराणों की गणना में कहीं भी इस तरह का उल्लेख नहीं है . गणना में केवल ' भागवत ' शब्द आया है ...
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......... महापुराण .........
अठारह पुराणों को बताने के लिए यह श्लोक है ...
.....मद्वयं भद्वयं चैव ब्रत्रयं व चतुष्टकम | अनापलिंगकूस्कानि पुराणानि पृथक पृथक ||
..... अर्थात -मद्वयं = मार्कंडेय , मत्स्य . भद्वयं = भागवत , भविष्य . चैव ब्रत्रयं = ब्रह्माण्ड , ब्रह्म , ब्रह्मवैवर्त . व चतुष्टकम = विष्णु , वामन, वाराह , वायु ( शिव ) | अनापलिंगकूस्कानि = अग्नि , नारद , पद्म , लिंग , गरुड़ , कूर्म , स्कन्द .पुराणानि पृथक पृथक || यह अठारह महापुराण है ...
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.....उप पुराण....
..... १- आदि पुराण , २- नरसिंह पुराण, ३- स्कन्द पुराण , ४- शिवधर्म पुराण , ५- दुर्वासा पुराण , ६- नारदोक्त पुराण , ७- कपिल पुराण , ८- वामन पुराण , ९- औशनस पुराण , १०- ब्रह्माण्ड पुराण , ११- वरुण पुराण , १२- कालिका पुराण , १३- माहेश्वर पुराण , १४ - साम्ब पुराण , १५- सौर पुराण , १६- पाराशर पुराण , १७ - मारीच पुराण , १८- भास्कर पुराण ...
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..... औप पुराण .....
..... १- सनत्कुमार पुराण , २- बृहन्नारदीय पुराण , ३- आदित्य पुराण , ४- मानव पुराण , ५- नंदिकेश्वर पुराण , ६- कौर्म पुराण , ७- भागवत पुराण , ८- वशिष्ठ पुराण , ९- भार्गव पुराण , १०- मुदगल पुराण , ११- कल्कि पुराण , १२-देवी पुराण , १३- महाभागवत पुराण , १४- बृहत्धर्म पुराण , १५- परानंद पुराण , १६- पशुपति पुराण , १७- वन्हि पुराण , १८- हरिवंश पुराण ...