Showing posts with label ज्योतिष. Show all posts
Showing posts with label ज्योतिष. Show all posts

Saturday, February 11, 2017

संवत 2074 सन 2017-18 में केतु का गोचर फल

श्री शुभ सम्वत् 2072 माघ मास कृष्ण पक्ष पंचमी (उदयकालीन), तदुपरान्त माघ मास कृष्ण पक्ष षष्ठी दिन शुक्रवार अंग्रेजी तारीखानुसार 29 जनवरी 2016 को घं.25 मि. 28 पर केतु का प्रवेश अपनी स्वाभाविक वक्र गति से कुम्भ राशि में होगा। तात्कालिक चन्द्रमा उस समय हस्त नक्षत्र, कन्या राशि पर स्थित रहेगा। वर्ष के अन्त तक केतु कुम्भ राशि में रहेगा। जिसका पाद व गोचर फल इस प्रकार है।             
    सन् 2017 में कुम्भ के केतु  का पाद बोधक फल।
01 जनवरी 2017 से 17 अगस्त 2017 तक।
मेष-कन्या-वृश्चिक राशि वालों को स्वर्ण पाद से व्यापार व नौकरी में बढ़ोत्तरी, पर पारिवारिक माहौल असंतुलित रहेगा। मान सम्मान व प्रतिष्ठा में कमी आयेगी, व्यर्थ भ्रमण।
वृष-सिंह-मकर राशि वालों को रजत पाद होने से सफलता मिलेगी, प्रत्येक क्षेत्र में किये प्रयास सफल होंगे, आय के नये स्त्रोत, इष्ट मित्रों का सहयोग, व्यापार में बढ़ोत्तरी होगी।
मिथुन-तुला-कुम्भ राशि वालों को लौह पाद होने से जीवन त्रस्त हो जायेगा, सामाजिक प्रतिष्ठा में कमी, मान-सम्मान व प्रतिष्ठा में कमी, आर्थिक हानि, परिवार में तनाव।
कर्क-मीन-धनु राशि वालों को ताम्रपाद से आगमन, शुभप्रद है प्रगति, लक्ष्मी प्राप्ति, वैभव, सुख-सम्पदा, प्रगति रोजगार आदि में सफल, धर्म-कर्म, सामाजिक कार्य में रूचि।
सन् 2017 में कुम्भ के केतु का गोचर फल।
01 जनवरी 2017 से 17 अगस्त 2017 तक।
    मेष राशि वालों को एकादश केतु शुभ प्रभाव बढ़ाने वाला है। राहु जनित दुष्प्रभावां को कम कर लाभार्जन की स्थिति अनुकूल रहेगी। संतान पक्ष की चिन्ता दूर होगी।
    वृष राशि वालों को दशमस्थ केतु शुभ प्रभावी होने से राहु के शुभ प्रभावां में वृद्धि होगी। बुद्धिचातुर्य से ऐसे काम को भी अंजाम दे पायेंगे जिसकी संभावना नकारात्मक होगी।
    मिथुन राशि वालों को नवम केतु पूज्य है। घर परिवार के दायित्व तो बढ़ेंगे किन्तु उनका सहजता से निर्वाह होगा, वृद्धजनों को तीर्थ यात्रा या विदेश यात्रा करनी पड़ सकती है।
    कर्क राशि वालों को आठवें केतु कष्टप्रद है, आय में प्रगति, व्यापार में समानता नही रहेगी, क्रोध की अधिकता से जीवन कष्टदायी होगा। परिवार में विघटन की स्थितियाँ बनेगी।
    सिंह राशि वालों को सप्तमस्थ केतु पूज्य है। पारिवारिक मनमुटाव, नित्य जीवन में कुछ कठिनाई अवश्य रहेगी। नौकरी व्यापारिक जीविका की सुरक्षा बनी रहेगी।
    कन्या राशि वालों को छठवें केतु शुभ प्रभावी होने से राहुजनित अशुभ प्रभावां को कम करने में सहायक रहेगा, राजकीय सहायता पा सकेंगे। आमदनी के नये स्त्रोत बनेंगे।
    तुला राशि वालों को पंचमस्थ केतु पूज्य है। विशेष प्रयत्नां से आर्थिक लाभ मिलेगा। सामाजिक राजनीतिक लोगां को सफलता के अवसर मिलेंगे। प्रियजनां से सहयोग सम्पर्क बढे़गा।
    वृश्चिक राशि वालां को चतुर्थ केतु अशुभ है। चालू काम धन्धे में बाधक स्थिति उत्पन्न होगी। शरीर कष्ट, मतिभ्रम, अपव्यय, दुर्घटना आदि की सम्भावना रहेगी।
    धनु राशि वालों को तृतीयस्थ केतु शुभ प्रभावी होने से राहु-जनित परेशानियाँ कम होंगी, श्रम संघर्ष के बावजूद रोग, ऋण, शत्रु का भय दूर होगा। भूमि वाहनादि का सुख
    मकर राशि वालों को द्वितीयस्थ केतु पूज्य है। धन पक्ष के प्रति सचेष्ट रहें, अन्यथा असावधानी या दैवीय विपदा से द्दन हानि होगी। वाणी की कठोरता से लोगों से सम्बन्ध कटु होंगे।
    कुम्भ राशि वालों को जन्मस्थ केतु श्रम संघर्ष की शक्ति देकर सफल जीवन का मार्ग प्रशस्त करेगा। धनाभाव, स्वजनां से आन्तरिक पीड़ा, प्रशासनिक अवरोध-विरोध, द्दर्मबल और दैनिक कठिनाइयों से पूर्ण सुरक्षा देगा।
    मीन राशि वालां को द्वादशस्थ केतु अशुभ होगा। इस कारण स्वास्थ्य के प्रति यदा-कदा सचेष्टता आवश्यक होगी। निरर्थक यात्रा करनी पड़ सकती है। विदेश यात्रा का भी योग बनेगा। व्ययाधिक्य, हठवादी प्रवृत्ति बढ़ जायेगी।
सन् 2017 में मकर के केतु का गोचर फल।
17 अगस्त 2017 से सम्वत्सरान्त तक।
    मेष राशि वालों को दशमस्थ केतु शुभ प्रभावी होने से राहु के शुभ प्रभावां में वृद्धि होगी। बुद्धिचातुर्य से ऐसे काम को भी अंजाम दे पायेंगे जिसकी संभावना नकारात्मक होगी।
    वृष राशि वालों को नवम केतु पूज्य है। घर परिवार के दायित्व तो बढ़ेंगे किन्तु उनका सहजता से निर्वाह होगा, वृद्धजनों को तीर्थ यात्रा या विदेश यात्रा करनी पड़ सकती है।
    मिथुन राशि वालों को आठवें केतु कष्टप्रद है, आय में प्रगति, व्यापार में समानता नही रहेगी, क्रोध की अधिकता से जीवन कष्टदायी होगा। परिवार में विघटन की स्थितियाँ बनेगी।
    कर्क राशि वालों को सप्तमस्थ केतु पूज्य है। पारिवारिक मनमुटाव, नित्य जीवन में कुछ कठिनाई अवश्य रहेगी। नौकरी व्यापारिक जीविका की सुरक्षा बनी रहेगी।
    सिंह राशि वालों को छठवें केतु शुभ प्रभावी होने से राहुजनित अशुभ प्रभावां को कम करने में सहायक रहेगा, राजकीय सहायता पा सकेंगे। आमदनी के नये स्त्रोत बनेंगे।
    कन्या राशि वालों को पंचमस्थ केतु पूज्य है। विशेष प्रयत्नां से आर्थिक लाभ मिलेगा। सामाजिक राजनीतिक लोगां को सफलता के अवसर मिलेंगे। प्रियजनां से सहयोग सम्पर्क बढे़गा।
    तुला राशि वालां को चतुर्थ केतु अशुभ है। चालू काम धन्धे में बाधक स्थिति उत्पन्न होगी। शरीर कष्ट, मतिभ्रम, अपव्यय, दुर्घटना आदि की सम्भावना रहेगी।
    वृश्चिक राशि वालों को तृतीयस्थ केतु शुभ प्रभावी होने से राहु-जनित परेशानियाँ कम होंगी, श्रम संघर्ष के बावजूद रोग, ऋण, शत्रु का भय दूर होगा। भूमि वाहनादि का सुख
    धनु राशि वालों को द्वितीयस्थ केतु पूज्य है। धन पक्ष के प्रति सचेष्ट रहें, अन्यथा असावधानी या दैवीय विपदा से द्दन हानि होगी। वाणी की कठोरता से लोगों से सम्बन्ध कटु होंगे।
    मकर राशि वालों को जन्मस्थ केतु श्रम संघर्ष की शक्ति देकर सफल जीवन का मार्ग प्रशस्त करेगा। धनाभाव, स्वजनां से आन्तरिक पीड़ा, प्रशासनिक अवरोध-विरोध, द्दर्मबल और दैनिक कठिनाइयों से पूर्ण सुरक्षा देगा।
    कुम्भ राशि वालां को द्वादशस्थ केतु अशुभ होगा। इस कारण स्वास्थ्य के प्रति यदा-कदा सचेष्टता आवश्यक होगी। निरर्थक यात्रा करनी पड़ सकती है।
    मीन राशि वालों को एकादश केतु शुभ प्रभाव बढ़ाने वाला है। राहु जनित दुष्प्रभावां को कम कर लाभार्जन की स्थिति अनुकूल रहेगी।

संवत 2074 सन 2017-18 में राहु का गोचर फल

राहु का गोचर फल
    श्री शुभ सम्वत् 2072 माघ मास कृष्ण पक्ष पंचमी (उदयकालीन), तदुपरान्त माघ मास कृष्ण पक्ष षष्ठी दिन शुक्रवार अंग्रेजी तारीखानुसार 29 जनवरी 2016 को घं.25 मि. 28 पर राहु का प्रवेश अपनी स्वाभाविक वक्र गति से सिंह राशि में होगा। तात्कालिक चन्द्रमा उस समय हस्त नक्षत्र, कन्या राशि पर स्थित रहेगा।
    इसके बाद श्री शुभ सम्वत् 2074 आश्विन मास कृष्ण पक्ष द्वादशी (उदयकालीन), तदुपरान्त त्रयोदशी दिन रविवार अंग्रेजी तारीखानुसार 17 अगस्त 2017 को घं.29 मि. 30 पर राहु का प्रवेश अपनी स्वाभाविक वक्र गति से कर्क राशि में होगा। तात्कालिक चन्द्रमा उस समय मघा नक्षत्र, सिंह राशि पर स्थित रहेगा।
    सम्वत्सर के अन्त तक राहु कर्क राशि में रहेगा। जिसका पाद व गोचर फल इस प्रकार है। 
सन् 2017 में सिंह के राहु का पाद बोधक फल।
01 जनवरी 2017 से 17 अगस्त 2017 तक।
मेष-कन्या-वृश्चिक राशि वालों को स्वर्ण पाद से व्यापार व नौकरी में बढ़ोत्तरी, पर पारिवारिक माहौल असंतुलित रहेगा। मान सम्मान व प्रतिष्ठा में कमी आयेगी, व्यर्थ भ्रमण।
वृष-सिंह-मकर राशि वालों को रजत पाद होने से सफलता मिलेगी, प्रत्येक क्षेत्र में किये प्रयास सफल होंगे, आय के नये स्त्रोत, इष्ट मित्रों का सहयोग, व्यापार में बढ़ोत्तरी होगी।
मिथुन-तुला-कुम्भ राशि वालों को लौह पाद होने से जीवन त्रस्त हो जायेगा, सामाजिक प्रतिष्ठा में कमी, मान-सम्मान व प्रतिष्ठा में कमी, आर्थिक हानि, परिवार में तनाव।
कर्क-मीन-धनु राशि वालों को ताम्रपाद से आगमन, शुभप्रद है प्रगति, लक्ष्मी प्राप्ति, वैभव, सुख-सम्पदा, प्रगति रोजगार आदि में सफल, धर्म-कर्म, सामाजिक कार्य में रूचि।
सन् 2017 में सिंह के राहु का गोचर फल।
01 जनवरी 2017 से 17 अगस्त 2017 तक।
    मेष राशि वालों के लिये पंचम राहु पूज्य है। चित्त अशान्त रहेगा। श्रम से किये हुये कार्य की भी सफलता संदिग्द्द रहेगी, किन्तु राशि गत प्रभाव के कारण अवरोधां को दूर करने के प्रति सचेष्ट रहेंगे।
    वृष राशि वालों को चौथा राहु अशुभ है। कार्य की प्रगति में बाधा पहुँचेगी, अप्रत्याशित स्थितियां के कारण नौकरी-व्यापार में प्रतिकूल स्थितियां उत्पन्न हांगी।
    मिथुन राशि वालों को तीसरे राहु शुभ प्रभावी है, मन की बेचैनी दूर होगी। बिगड़ा काम बनेगा, नौकरी-व्यापार में सफलता की ओर अग्रसर होंगे। आर्थिक पक्ष मजबूत करता है।
    कर्क राशि वालां को दूसरे राहु पूज्य है, इसलिये इस राशि वाले जातक को राहु स्वास्थ्य की दृष्टि से प्रतिकूल रहेगा। मानसिक उलझनों में वृद्धि होगी, दुष्टजनां से परेशानी होगी।
    सिंह राशि वालों को जन्मस्थ राहु पूज्य है। दैनिक कामकाज अधिक परिश्रम से आंशिक रूप से ही पूरे होंगे। अव्यवस्थित दिनचर्या रहेगी। दौड़-धूप निरर्थक साबित हांगे।
    कन्या राशि वालों को द्वादश राहु अशुभ है। शारीरिक, बौद्धिक, मानसिक कष्ट बढ़ेगा। यात्रा में असफलता तो मिलेगी किन्तु कभी-कदा अनुकूल स्थितियाँ भी बनेगी।
    तुला राशि वालों को एकादश राहु शुभ है। दैनिक कामकाज उन्नति पर होगा। कार्य व्यवसाय का विस्तार, मान सम्मान पद प्रतिष्ठा की वृद्धि, भूमि-क्रय, एवं वाहनादि सौख्य की वृद्धि, उच्चवर्गीय लोगां को विदेश यात्रा भी करनी पड़ सकती है।
    वृश्चिक राशि वालां को दशमस्थ राहु शुभ है। सामयिक कार्यो में सफलता, धर्म-अध्यात्म के प्रति निष्ठा, आस्था में वृद्धि, सामाजिक विकास होगा। छात्रां को अपेक्षित सफलता मिलेगी।
    धनु राशि वालों को नवम राहु पूज्य है। पारिवारिक विरोध, भाग्योदय में रूकावटें, हानि लाभ की समानता, खर्च में वृद्धि होगी, श्रेष्ठजनों की संगति प्रभावपूर्ण साबित होगी।
    मकर राशि वालों को अष्टमस्थ राहु अशुभ है। समस्याआें की जटिलताएं बढ़ जाएंगी। शारीरिक स्वास्थ्य अनुकूल नहीं रहेगा। उत्साह-हीनता बढ़ जाने से कार्यों में सफलता संदिग्ध रहेगी।
    कुम्भ राशि वालों को सातवें राहु पूज्य है। आवश्यक कामों में श्रम से सफलता मिलेगी। नौकरी व्यापार आदि जीविका की सुरक्षा, पारिवारिक दायित्वों का निर्वाह।
    मीन राशि वालों को छठवें राहु शुभ है। अधूरे संकल्प पूरे हांगे। आरोग्य सुख उत्तम रहेगा। शारीरिक क्षमता में वृद्धि, साहस के कामां में सफलता दिलाकर सभी अरिष्टों को दूर करेगा।
सन् 2017 में कर्क के राहु का पाद बोधक फल।
17 अगस्त 2017 से सम्वत्सरान्त तक।
मेष-कन्या-धनु राशि वालों को ताम्रपाद से आगमन, शुभप्रद है प्रगति, लक्ष्मी प्राप्ति, वैभव, सुख-सम्पदा, प्रगति रोजगार आदि में सफल, धर्म-कर्म, सामाजिक कार्य में रूचि।
वृष-तुला-कुम्भ राशि वालों को रजत पाद होने से सफलता मिलेगी, प्रत्येक क्षेत्र में किये प्रयास सफल होंगे, आय के नये स्त्रोत, इष्ट मित्रों का सहयोग, व्यापार में बढ़ोत्तरी होगी।
मिथुन-सिंह-मकर राशि वालों को स्वर्ण पाद से व्यापार व नौकरी में बढ़ोत्तरी, पर पारिवारिक माहौल असंतुलित रहेगा। मान सम्मान व प्रतिष्ठा में कमी आयेगी, व्यर्थ भ्रमण।
कर्क-वृश्चिक-मीन राशि वालों को लौह पाद होने से जीवन त्रस्त हो जायेगा, सामाजिक प्रतिष्ठा में कमी, मान-सम्मान व प्रतिष्ठा में कमी, आर्थिक हानि, परिवार में तनाव।
सन् 2017 में कर्क के राहु का गोचर फल।
17 अगस्त 2017 से सम्वत्सरान्त तक।
    मेष राशि वालों को चौथा राहु अशुभ है। कार्य की प्रगति में बाधा पहुँचेगी, अप्रत्याशित स्थितियां के कारण नौकरी-व्यापार में प्रतिकूल स्थितियां उत्पन्न हांगी।
    वृष् राशि वालों को तीसरे राहु शुभ प्रभावी है, मन की बेचैनी दूर होगी। बिगड़ा काम बनेगा, नौकरी-व्यापार में सफलता की ओर अग्रसर होंगे। आर्थिक पक्ष मजबूत करता है।
    मिथुन राशि वालां को दूसरे राहु पूज्य है, इसलिये इस राशि वाले जातक को राहु स्वास्थ्य की दृष्टि से प्रतिकूल रहेगा। मानसिक उलझनों में वृद्धि होगी, दुष्टजनां से परेशानी होगी।
    कर्क राशि वालों को जन्मस्थ राहु पूज्य है। दैनिक कामकाज अधिक परिश्रम से आंशिक रूप से ही पूरे होंगे। अव्यवस्थित दिनचर्या रहेगी। दौड़-धूप निरर्थक साबित हांगे।
    सिंह राशि वालों को द्वादश राहु अशुभ है। शारीरिक, बौद्धिक, मानसिक कष्ट बढ़ेगा। यात्रा में असफलता तो मिलेगी किन्तु कभी-कदा अनुकूल स्थितियाँ भी बनेगी।
    कन्या राशि वालों को एकादश राहु शुभ है। दैनिक कामकाज उन्नति पर होगा। कार्य व्यवसाय का विस्तार, मान सम्मान पद प्रतिष्ठा की वृद्धि, भूमि-क्रय, एवं वाहनादि सौख्य की वृद्धि, उच्चवर्गीय लोगां को विदेश यात्रा भी करनी पड़ सकती है।
    तुला राशि वालां को दशमस्थ राहु शुभ है। सामयिक कार्यो में सफलता, धर्म-अध्यात्म के प्रति निष्ठा, आस्था में वृद्धि, सामाजिक विकास होगा। छात्रां को अपेक्षित सफलता मिलेगी।
    वृश्चिक राशि वालों को नवम राहु पूज्य है। पारिवारिक विरोध, भाग्योदय में रूकावटें, हानि लाभ की समानता, खर्च में वृद्धि होगी, श्रेष्ठजनों की संगति प्रभावपूर्ण साबित होगी।
    धनु राशि वालों को अष्टमस्थ राहु अशुभ है। समस्याआें की जटिलताएं बढ़ जाएंगी। शारीरिक स्वास्थ्य अनुकूल नहीं रहेगा। उत्साह-हीनता बढ़ जाने से कार्यों में सफलता संदिग्ध रहेगी।
    मकर राशि वालों को सातवें राहु पूज्य है। आवश्यक कामों में श्रम से सफलता मिलेगी। नौकरी व्यापार आदि जीविका की सुरक्षा, पारिवारिक दायित्वों का निर्वाह।
    कुम्भ राशि वालों को छठवें राहु शुभ है। अधूरे संकल्प पूरे हांगे। आरोग्य सुख उत्तम रहेगा। शारीरिक क्षमता में वृद्धि, साहस के कामां में सफलता दिलाकर सभी अरिष्टों को दूर करेगा।
    मीन राशि वालों के लिये पंचम राहु पूज्य है। चित्त अशान्त रहेगा। श्रम से किये हुये कार्य की भी सफलता संदिग्ध रहेगी, किन्तु राशि गत प्रभाव के कारण अवरोधां को दूर करने के प्रति सचेष्ट रहेंगे।

संवत 2074 सन 2017-18 में गुरू का गोचर फल

                श्री शुभ सम्वत् 2073, श्रावण मास शुक्ल पक्ष उदयकालीन तिथि अष्टमी, तत्पश्चात् नवमी गुरूवार अंग्रेजी तारीखानुसार 11 अगस्त 2016 को घं.21 मि.26 पर गुरू देव कन्या राशि में प्रवेश कर चुके है, तात्कालिक चन्द्र उस समय अनुराधा नक्षत्र एवं वृश्चिक राशि में स्थित था। वर्ष 2017 के प्रारम्भ में गुरूदेव कन्या राशि में ही रहेंगे।
    श्री शुभ सम्वत् 2074, आश्विन मास कृष्ण पक्ष उदयकालीन तिथि सप्तमी, तत्पश्चात् अष्टमी मंगलवार अंग्रेजी तारीखानुसार 12 सितम्बर 2017 को घं.28 मि.10 पर गुरू देव तुला राशि में प्रवेश करेंगे, तात्कालिक चन्द्र उस समय रोहिणी नक्षत्र एवं वृष राशि में स्थित रहेगा। सम्वम्सरान्त तक गुरूदेव कन्या राशि में ही रहेंगे। 
    अंग्रेजी तारीखानुसार 06 फरवरी 2017 सोमवार को घं.22 मि.04 से गुरूदेव कन्या राशि में वक्री होंगे, तत्पश्चात् ता.09 जून 2017 दिन शुक्रवार को घं.29 मि.21 पर गुरू देव मार्गी हो जाएंगे, और 09 मार्च 2018 तक मार्गी ही रहेंगे, तत्पश्चात् 09 मार्च 2018 से पुनः गुरूदेव घं.20 मि.04 पर वक्री होंगे। जिसका पाद एवं गोचर फल इस प्रकार है। विशेष तथ्य यह है कि वक्री गुरू की अवधि में विपरीत फल समझें अर्थात् शुभ स्थान पर अशुभ व अशुभ की जगह शुभ फल मानें।
सन् 2017 में कन्या राशि के गुरू का पाद बोधक फल
01 जनवरी 2017 से 12 सितम्बर 2017 तक।
    मेष-सिंह-धनु राशि वालों को लौह पाद होने से जीवन त्रस्त हो जायेगा, सामाजिक प्रतिष्ठा में कमी, मान-सम्मान व प्रतिष्ठा में कमी, आर्थिक हानि, परिवार में तनाव।
वृष-कन्या-कुम्भ राशि वालों को ताम्रपाद से आगमन, शुभप्रद है प्रगति, लक्ष्मी प्राप्ति, वैभव, सुख-सम्पदा, प्रगति रोजगार आदि में सफल, धर्म-कर्म, सामाजिक कार्य में रूचि लेंगे।
मिथुन-वृश्चिक-मकर राशि वालों को स्वर्ण पाद से व्यापार व नौकरी में बढ़ोत्तरी, पर पारिवारिक माहौल असंतुलित रहेगा। मान सम्मान व प्रतिष्ठा में कमी आयेगी, व्यर्थ भ्रमण।
कर्क-तुला-मीन राशि वालों को रजत पाद होने से सफलता मिलेगी, प्रत्येक क्षेत्र में किये प्रयास सफल होंगे, आय के नये स्त्रोत, इष्ट मित्रों का सहयोग, व्यापार में बढ़ोत्तरी होगी।
सन् 2017 में कन्या राशि के लिए गुरू का गोचर फल
01 जनवरी 2017 से 12 सितम्बर 2017 तक।
    मेष राशि वालां के लिये छठवें गुरू पूज्य है यह परेशानियां को बढ़ाने में सहायक होगा। कार्यो में आकस्मिक व्यवधान, स्वास्थ्य बाधा, मानसिक चिन्ता व्यग्रता रहेगी।
    वृष राशि वालां के लिये पंचमस्थ गुरू शुभ है यह श्रेष्ठ प्रभाव उत्पन्न करेगा, परन्तु अनुकूल परिणाम पाने के लिये विशेष प्रयास भी करना पड़ेगा। श्रम संघर्ष से अभीष्ट सिद्धि, आर्थिक अभ्युन्नति, मुकदमा-परीक्षा प्रतियोगिता में अनुकूल अवसर मिलेंगे।
    मिथुन राशि वालां के लिये चतुर्थ गुरू अशुभ है अतः सुख-सौभाग्य में कमी होने के साथ ही आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहेगा, आपका प्रयास-परिश्रम ही परेशानियां को कम करेगा। आर्थिक लेन देन के प्रति सचेष्ट रहें। स्वजन कुटुम्बियां से विघ्न बाधा, मित्रों से तनाव की स्थिति बनेगी। 
    कर्क राशि वालां के लिये तृतीय भाव में गुरू पूज्य है। विशेष प्रयास करना होगा। आर्थिक दृष्टि से गुरू अभ्युन्नति की ओर ले जायेगा। स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। मान सम्मान पद प्रतिष्ठा धन ऐश्वर्य की वृद्धि होगी। आत्मबल मनोबल की वृद्धि होगी।
    सिंह राशि वालां को द्वितीयस्थ गुरू ज्यादा अच्छा नहीं है। यह दुख कलह विवाद करायेगा। कार्यक्षेत्र में उन्नति एवं सफलता तथा अभीष्ट सिद्धि कठिन संघर्ष से ही प्राप्त होगी। आजीविका विहीन लोगों को स्थिर व्यवसाय की प्राप्ति होगी।
    कन्या राशि वालों को जन्मस्थ गुरू पूज्य हैं यह भाग्यवृद्धि में सहायक होगा। शारीरिक स्वास्थ्य के प्रति सावधानी बरतनी चाहिये। कर्तव्यनिष्ठ जीवन शैली के कारण सुख सौभाग्य, द्दन-ऐश्वर्य की वृद्धि होगी। पारिवारिक दायित्व का निर्वाह होगा।
    तुला राशि वालों को लिये बारहवें गुरू नेष्ट है अतः स्वास्थ्य कमजोर रहेगा। सहयोगीजनां से वैमनस्य बढे़गा। सामाजिक राजनीतिक क्षेत्र से जुड़े व्यक्तियां की समस्याआें का सहज समाद्दान नहीं हो पायेगा। धन-व्यय की अधिकता रहेगी।
    वृश्चिक राशि वालां के लिये ग्यारहवें गुरू शुभ और सर्वसिद्धिकारक रहेगा। सामायिक समस्याओं का समाधान अपनी इच्छा के अनुरूप होगा। आर्थिक पक्ष मजबूत होगा। नये निवेश या उद्यमों के प्रति आकर्षण ही नहीं बढे़गा।
    धनु राशि वालां के लिये दशमस्थ गुरू पूज्य है यह कठोर श्रम संघर्ष परेशानियों उलझनों को बढ़ाने वाला ही साबित होगा, अनावश्यक परिवर्तन से हानि, मानसिक चिन्ता में वृद्धि विरोध पक्ष के कारण कार्यो में गतिरोध, व्ययाधिक्य रहेगा।
    मकर राशि वालों के लिये भाग्यस्थ गुरू शुभ फलप्रद है। गुरू का आगमन आपको श्रेष्ठ स्थिति की ओर ले जाने वाला साबित होगा। आयु आरोग्य सुख की वृद्धि अभीष्ट कामों में सफलता, संतानपक्ष से सुखद अनुभूति। धन-ऐश्वर्य की वृद्धि।
    कुम्भ राशि वालां के लिये अष्टम भाव में गुरू नेष्ट माना गया है किन्तु कठिनाईयां में भी आशा की किरण दिखलाई पड़ेगी। मानसिक अशान्ति, मतिभ्रम, चित्त की अस्थिरता से परेशानी होगी। आर्थिक क्षेत्र में असंतुलन बढे़गा।
    मीन राशि वालों के लिये सातवें गुरू शुभ है। यह श्रेष्ठ प्रभाव उत्पन्न करेगा। कार्य व्यापार की सफलता के लिये विशेष सार्थक प्रयास करना होगा। विचारां में सहिष्णुता परोपकार की भावना का उदय होगा। आर्थिक दृष्टि से गुरू सफलतादायी है।
सन् 2017 में तुला राशि के गुरू का पाद बोधक फल
12 सितम्बर 2017 से सम्वत्सरान्त तक।
    मेष-कन्या-मकर राशि वालों को रजत पाद होने से सफलता मिलेगी, प्रत्येक क्षेत्र में किये प्रयास सफल होंगे, आय के नये स्त्रोत, इष्ट मित्रों का सहयोग, व्यापार में बढ़ोत्तरी होगी।        
वृष-कर्क-धनु राशि वालों को स्वर्ण पाद से व्यापार व नौकरी में बढ़ोत्तरी, पर पारिवारिक माहौल असंतुलित रहेगा। मान सम्मान व प्रतिष्ठा में कमी आयेगी, व्यर्थ भ्रमण भी करना पड़ेगा।
मिथुन-तुला-कुम्भ राशि वालों को लौह पाद होने से जीवन त्रस्त हो जायेगा, सामाजिक प्रतिष्ठा में कमी, मान-सम्मान व प्रतिष्ठा में कमी, आर्थिक हानि, परिवार में तनाव, अशान्ति। 
    सिंह-वृश्चिक-कुम्भ राशि वालों को ताम्रपाद से आगमन, शुभप्रद है प्रगति, लक्ष्मी प्राप्ति, वैभव, सुख-सम्पदा, प्रगति रोजगार आदि में सफल, धर्म-कर्म, सामाजिक कार्य में रूचि लेंगे।
सन् 2017 में तुला राशि के गुरू का गोचर फल
12 सितम्बर 2017 से सम्वत्सरान्त तक।
    मेष राशि वालों के लिये सातवें गुरू शुभ है। यह श्रेष्ठ प्रभाव उत्पन्न करेगा। कार्य व्यापार की सफलता के लिये विशेष सार्थक प्रयास करना होगा। विचारां में सहिष्णुता परोपकार की भावना का उदय होगा। आर्थिक दृष्टि से गुरू सफलतादायी है।
    वृष राशि वालां के लिये छठवें गुरू पूज्य है यह परेशानियां को बढ़ाने में सहायक होगा। कार्यो में आकस्मिक व्यवधान, स्वास्थ्य बाधा, मानसिक चिन्ता व्यग्रता रहेगी।   
    मिथुन राशि वालां के लिये पंचमस्थ गुरू शुभ है यह श्रेष्ठ प्रभाव उत्पन्न करेगा, परन्तु अनुकूल परिणाम पाने के लिये विशेष प्रयास भी करना पड़ेगा। श्रम संघर्ष से अभीष्ट सिद्धि, आर्थिक अभ्युन्नति, मुकदमा-परीक्षा प्रतियोगिता में सफलता के अनुकूल अवसर मिलेंगे। एकाधिक स्त्रोतो से आमदनी होगी।    
    कर्क राशि वालां के लिये चतुर्थ गुरू अशुभ है अतः सुख-सौभाग्य में कमी होने के साथ ही आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहेगा, आपका प्रयास-परिश्रम ही परेशानियां को कम करेगा। आर्थिक लेन देन के प्रति सचेष्ट रहें। स्वजन कुटुम्बियां से विघ्न बाधा, मित्रों से तनाव की स्थिति बनेगी। 
    सिंह राशि वालां के लिये तृतीय भाव में गुरू पूज्य है। विशेष प्रयास करना होगा। आर्थिक दृष्टि से गुरू अभ्युन्नति की ओर ले जायेगा। स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। मान सम्मान पद प्रतिष्ठा धन ऐश्वर्य की वृद्धि होगी। आत्मबल मनोबल की वृद्धि होगी।
    कन्या राशि वालों  को द्वितीयस्थ गुरू ज्यादा अच्छा नहीं है। यह दुख कलह विवाद करायेगा। कार्यक्षेत्र में उन्नति एवं सफलता तथा अभीष्ट सिद्धि कठिन संघर्ष से ही प्राप्त होगी।
    तुला राशि वालों को जन्मस्थ गुरू पूज्य हैं यह भाग्यवृद्धि में सहायक होगा। शारीरिक स्वास्थ्य के प्रति सावधानी बरतनी चाहिये। कर्तव्यनिष्ठ जीवन शैली के कारण सुख सौभाग्य, द्दन-ऐश्वर्य की वृद्धि होगी। पारिवारिक दायित्व का निर्वाह होगा।
    वृश्चिक राशि वालों को लिये बारहवें गुरू नेष्ट है अतः स्वास्थ्य कमजोर रहेगा। सहयोगीजनां से वैमनस्य बढे़गा। सामाजिक राजनीतिक क्षेत्र से जुड़े व्यक्तियां की समस्याआें का सहज समाद्दान नहीं हो पायेगा। धन-व्यय की अधिकता रहेगी।
    धनु राशि वालां के लिये ग्यारहवें गुरू शुभ और सर्वसिद्धिकारक रहेगा। सामायिक समस्याओं का समाधान अपनी इच्छा के अनुरूप होगा। आर्थिक पक्ष मजबूत होगा। नये निवेश या उद्यमों के प्रति आकर्षण ही नहीं बढे़गा, अपितु अपेक्षित सफलता भी मिलेगी। नौकरी में पदोन्नति।
    मकर राशि वालां के लिये दशमस्थ गुरू पूज्य है यह कठोर श्रम संघर्ष परेशानियों उलझनों को बढ़ाने वाला ही साबित होगा, अनावश्यक परिवर्तन से हानि, मानसिक चिन्ता में वृद्धि विरोध पक्ष के कारण कार्यो में गतिरोध, व्ययाधिक्य रहेगा।
    कुम्भ राशि वालों के लिये भाग्यस्थ गुरू शुभ फलप्रद है। गुरू का आगमन आपको श्रेष्ठ स्थिति की ओर ले जाने वाला साबित होगा। आयु आरोग्य सुख की वृद्धि अभीष्ट कामों में सफलता, संतानपक्ष से सुखद अनुभूति। धन-ऐश्वर्य की वृद्धि।
    मीन राशि वालां के लिये अष्टम भाव में गुरू नेष्ट माना गया है किन्तु कठिनाईयां में भी आशा की किरण दिखलाई पड़ेगी। मानसिक अशान्ति, मतिभ्रम, चित्त की अस्थिरता से परेशानी होगी। आर्थिक क्षेत्र में असंतुलन बढे़गा।

Wednesday, February 8, 2017

सम्वत् 2074 सन् 2017/18 में शनि का गोचर विचार

शनि का गोचर फल
    श्री शुभ सम्वत् 2073, कार्तिक शुक्ल पक्ष उदया तिथि दशमी, तदुपरान्त एकादशी तदनुसार अंग्रेजी तारीखानुसार 2 नवम्बर 2014 दिन रविवार को घं.20 मि.52 पर शनि देव का प्रवेश वृश्चिक राशि में हो चुका है। उस समय तात्कालिक चन्द्रमा शतभिषा नक्षत्र एवं कुम्भ राशि पर स्थित था।
    वर्ष 2017 की शुरूआत में शनि देव अपनी  मार्गी गति से वृश्चिक राशि पर भ्रमण करते हुए प्रवेश करेंगे। श्री शुभ सम्वत् 2073 माघ मास कृष्ण पक्ष चतुर्दशी गुरूवार तदनुसार अंग्रेजी तारीखानुसार ता. 26 जनवरी 2017 को घं.19 मि.29 पर शनि देव मार्गी गति से धनु राशि में प्रवेश करेंगे, उस समय तात्कालिक चन्द्रमा पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र एवं धनु राशि पर स्थित रहेगा। श्री शुभ सम्वत् 2074 चैत्र मास शुक्ल पक्ष उदया तिथि दशमी तात्कालिक तिथि एकादशी गुरूवार तदनुसार अंग्रेजी तारीखानुसार 06 अप्रैल 2017 को शनि देव घं.21 मि.46 पर वक्री होंगे, तत्पश्चात् श्री शुभ सम्वत् 2074 आषाढ़ मास कृष्ण पक्ष उदया तिथि द्वादशी, तात्कालिक तिथि त्रयोदशी मंगलवार तदनुसार अंग्रेजी तारीखानुसार ता. 20 जून 2017 को घं.28 मि.46 पर शनि देव वक्री गति से वृश्चिक राशि में पुनः प्रवेश करेंगे, उस समय तात्कालिक चन्द्रमा भरणी नक्षत्र एवं मेष राशि पर स्थित रहेगा, तत्पश्चात् श्री शुभ सम्वत् 2074 कार्तिक मास शुक्ल पक्ष उदया तिथि षष्ठी, तात्कालिक तिथि सप्तमी गुरूवार तदनुसार अंग्रेजी तारीखानुसार ता. 26 अक्टूबर 2017 को घं.19 मि.39 पर शनि देव मार्गी गति से पुनः धनु राशि में प्रवेश करेंगे, उस समय तात्कालिक चन्द्रमा पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र एवं धनु राशि पर स्थित रहेगा, सम्वत्सरान्त तक शनिदेव धनु राशि पर ही स्थित रहेंगे।
    विशेष तथ्य यह है कि वक्री शनि की अवधि में विपरीत फल समझें अर्थात् शुभ स्थान पर अशुभ व अशुभ की जगह शुभ फल मानें। शनि का पादबोधक एवं गोचर फल इसप्रकार है।
सन् 2017 में वृश्चिक के शनि का पाद बोधक फल
(वर्ष के प्रारम्भ से अन्त तक)

संक्षिप्त में मेष-कन्या-कुम्भ राशि वालों के लिए स्वर्णपाद से शनि का आगमन कुछ कष्टप्रद रहेगा, यश-प्रतिष्ठा में कमी प्रियजन या पारिवारिक जन का विछोह।
वृष-सिंह-धनु राशि वालों को ताम्रपाद से शनि का आगमन आर्थिक व्यावसायिक क्षेत्र में प्रगति, पूर्व निर्द्दारित कार्यों में सफलता, भौतिक सुख साधनों में वृद्धिकारक है।
मिथुन-तुला-मकर राशि वालों के लिये रजतपाद से शनि का आगमन किसी नये कार्य का शुभारम्भ आजीविका के साधनों में वृद्धि पारिवारिक सुख शांति, जन-सम्पर्क बढ़ेगा।
कर्क-वृश्चिक-मीन राशि वालों को लौहपाद से शनि का आगमन संघर्षपूर्ण होगा। आजीविका के लिए श्रम-संघर्ष, पारिवारिक तनाव, परिश्रम से ही स्थितियाँ अनुकूल हो सकती हैं।
वृश्चिक राशिस्थ शनि का गोचर फल
    ( 01 जनवरी 2017 से 26 जनवरी 2017 तक एवं 20 जून 2017 से 26 अक्टूबर 2017 तक )       
    मेष राशि वालों को- अष्टम शनि अशुभ है। कष्ट वाद-विवाद व कलह की स्थिति बनी रहेगी। राजकीय पक्ष से विरोध का सामना करना पड़ेगा। स्त्री को कष्ट, स्वास्थ्य में कमी गड़बड़ी एवं अत्यन्त अशुभ दशा वालों को पत्नी का वियोग भी सहना पड़ेगा। स्त्रियों को उदर विकार से भी कष्ट होगा।
    वृष राशि वालों को- सप्तम शनि पूज्य है। आर्थिक समस्याओं से छुटकारा, रूके हुये धन की प्राप्ति और आय में वृद्धि होगी, लेकिन दुख और कलह से चित्त अशान्त रहेगा।
    मिथुन राशि वालों को- छठा शनि शुभ है। यश कीर्ति तथा कार्य में लाभ एवं सफलता मिलेगी। रोगों से छुटकारा मिलेगा, एवं स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। अनेक तरह के उत्तम भोगों की प्राप्ति होगी। शत्रु पक्ष निर्बल होकर परास्त होगा।
    कर्क राशि वालों के लिए - पाँचवा शनि पूज्य है। परिश्रम एवं संघर्ष से ही कार्य में सफलता संभव है। कुसंगति से बुद्धि विवेक नष्ट होगा। धर्म पत्नी से सम्बन्ध तनाव की स्थिति तक जा सकते हैं आर्थिक पक्ष कमजोर होकर अशुभ दशा वालों के लिए चिंतनीय भी हो सकता है।
     सिंह राशि वालों को - चतुर्थ शनि अशुभ है। दुख एवं कलह विवाद की स्थिति बनायेगा। सामाजिक एवं राजकीय पक्ष से असहयोग एवं विरोद्द प्राप्त होगा। आर्थिक अभाव प्रबल रूप ले सकता है। नौकरी पेशा वालों को स्थान परिवर्तन संभव है।
    कन्या राशि वालों को-  तीसरा शनि श्रेष्ठ है, लेकिन श्रम संघर्ष की स्थिति बनी रहेगी। कभी-कभी चिंता व्यय की अधिकता और असफलता से कष्ट मिलेगा। ससुराल पक्ष से तनाव, पत्नी से वाद-विवाद कलह व पिता से असंतोष मिलेगा।
    तुला राशि वालों को - इस राशि वालांं को द्वितीय शनि पूज्य है। यह साढ़ेसाती की अन्तिम ढैय्या है, इसमें स्थान परिवर्तन की बहुत अधिक संभावना है। 
    वृश्चिक राशि वालों को -जन्मस्थ शनि पूज्य है, साढ़ेसाती की बीच की ढय्या है। शनि का रजत पाद कष्टप्रद है। अतः सुख-दुख समान रूप से चलते रहेंगे। मानसिक शक्ति कमजोर होगी। जीवन साथी व अपने घनिष्ठ कुटुम्बियों से विवाद होगा।
     धनु राशि वालों को- द्वादश शनि अशुभ है। विघ्न तथा कष्ट बने रहेंगे। अशुभ दशा वालों को संतान के प्रति विशेष चिंता रहेगी। संतान पक्ष को व्याधियों से कष्ट होगा। 
     मकर राशि वालों को - एकादश शनि शुभ है। लम्बी बीमारी से ग्रस्त लोगों को स्वास्थ्य लाभ होगा। नये पद एवं अधिकार में वृद्धि होगी। पत्नी पक्ष से सहयोग मिलेगा व धन की प्राप्ति भी होगी। स्त्री एवं संतान का सुख प्राप्त होगा।
     कुम्भ राशि वालों का - दशम शनि शुभ है। श्रम व संघर्ष की स्थिति बनी रहेगी पर समय -समय पर धन की प्राप्ति होती रहेगी। आर्थिक सफलता होते हुए भी सम्पत्ति क्षय का भी भय बना रहेगा। व्यक्तित्व आत्मनिर्भर होगा।
    मीन राशि वालों को - नवम शनि पूज्य है। अपने से छोटे लोगों के अवज्ञा करने से चित्त अशान्त होगा। मान सम्मान में कमी होगी। तीर्थाटन निष्प्रयोजन होने से असंतोष एवं धर्म के प्रति अनास्था होगी।
सन् 2017 में धनु के शनि का पाद बोधक फल (27 जनवरी 2017 से 19 जून 2017 तक एवं 27 अक्टूबर 2017 से सम्वत्सरान्त तक)
संक्षिप्त में मेष-सिंह-वृश्चिक राशि वालों के लिये रजतपाद से शनि का आगमन किसी नये कार्य का शुभारम्भ आजीविका के साधनों में वृद्धि पारिवारिक सुख शांति, जन-सम्पर्क बढ़ेगा।
वृष-कन्या-मकर राशि वालों को लौहपाद से शनि का आगमन संघर्षपूर्ण होगा। आजीविका के लिए श्रम-संघर्ष, पारिवारिक तनाव, परिश्रम से ही स्थितियाँ अनुकूल हो सकती हैं।
मिथुन-तुला-मीन राशि वालों को ताम्रपाद से शनि का आगमन आर्थिक व्यावसायिक क्षेत्र में प्रगति, पूर्व निर्द्दारित कार्यों में सफलता, भौतिक सुख साधनों में वृद्धिकारक है।
कर्क-धनु-कुम्भ राशि वालों के लिए स्वर्णपाद से शनि का आगमन कुछ कष्टप्रद रहेगा, यश-प्रतिष्ठा में कमी प्रियजन या पारिवारिक जन का विछोह।
धनु राशिस्थ शनि का गोचर फल
         ( 27 जनवरी 2017 से 19 जून 2017 तक एवं 27 अक्टूबर 2017 से सम्वत्सरान्त तक )            
मेष राशि वालों को - नवम शनि पूज्य है। अपने से छोटे लोगों के अवज्ञा करने से चित्त अशान्त होगा। मान सम्मान में कमी होगी। तीर्थाटन निष्प्रयोजन होने से असंतोष एवं धर्म के प्रति अनास्था होगी। कलह एवं व्याधियों से जीवन दुखी होगा।
    वृष राशि वालों को- अष्टम शनि अशुभ है। कष्ट वाद-विवाद व कलह की स्थिति बनी रहेगी। राजकीय पक्ष से विरोध का सामना करना पड़ेगा। स्त्री को कष्ट, स्वास्थ्य में कमी गड़बड़ी एवं अत्यन्त अशुभ दशा वालों को पत्नी का वियोग भी सहना पड़ेगा। स्त्रियों को उदर विकार से भी कष्ट होगा।
    मिथुन राशि वालों को- सप्तम शनि पूज्य है। आर्थिक समस्याओं से छुटकारा, रूके हुये धन की प्राप्ति और आय में वृद्धि होगी, लेकिन दुख और कलह से चित्त अशान्त रहेगा।
    कर्क राशि वालों को- छठा शनि शुभ है। यश कीर्ति तथा कार्य में लाभ एवं सफलता मिलेगी। रोगों से छुटकारा मिलेगा, एवं स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। अनेक तरह के उत्तम भोगों की प्राप्ति होगी। शत्रु पक्ष निर्बल होकर परास्त होगा।
    सिंह राशि वालों के लिए - पाँचवा शनि पूज्य है। परिश्रम एवं संघर्ष से ही कार्य में सफलता संभव है। कुसंगति से बुद्धि विवेक नष्ट होगा। धर्म पत्नी से सम्बन्ध तनाव की स्थिति तक जा सकते हैं आर्थिक पक्ष कमजोर होकर अशुभ दशा वालों के लिए चिंतनीय भी हो सकता है।
     कन्या राशि वालों को - चतुर्थ शनि अशुभ है। दुख एवं कलह विवाद की स्थिति बनायेगा। सामाजिक एवं राजकीय पक्ष से असहयोग एवं विरोद्द प्राप्त होगा। आर्थिक अभाव प्रबल रूप ले सकता है। नौकरी पेशा वालों को स्थान परिवर्तन संभव है।
    तुला राशि वालों को-  तीसरा शनि श्रेष्ठ है, लेकिन श्रम संघर्ष की स्थिति बनी रहेगी। कभी-कभी चिंता व्यय की अधिकता और असफलता से कष्ट मिलेगा। ससुराल पक्ष से तनाव, पत्नी से वाद-विवाद कलह व पिता से असंतोष मिलेगा।
    वृश्चिक राशि वालों को - इस राशि वालांं को द्वितीय शनि पूज्य है। यह साढ़ेसाती की अन्तिम ढैय्या है, इसमें स्थान परिवर्तन की बहुत अधिक संभावना है। 
    धनु राशि वालों को -जन्मस्थ शनि पूज्य है, साढ़ेसाती की बीच की ढय्या है। शनि का रजत पाद कष्टप्रद है। अतः सुख-दुख समान रूप से चलते रहेंगे। मानसिक शक्ति कमजोर होगी। जीवन साथी व अपने घनिष्ठ कुटुम्बियों से विवाद होगा।
     मकर राशि वालों को- द्वादश शनि अशुभ है। विघ्न तथा कष्ट बने रहेंगे। अशुभ दशा वालों को संतान के प्रति विशेष चिंता रहेगी। संतान पक्ष को व्याधियों से कष्ट होगा। 
     कुम्भ राशि वालों को - एकादश शनि शुभ है। लम्बी बीमारी से ग्रस्त लोगों को स्वास्थ्य लाभ होगा। नये पद एवं अधिकार में वृद्धि होगी। पत्नी पक्ष से सहयोग मिलेगा व धन की प्राप्ति भी होगी। स्त्री एवं संतान का सुख प्राप्त होगा।
     मीन राशि वालों का - दशम शनि शुभ है। श्रम व संघर्ष की स्थिति बनी रहेगी पर समय -समय पर धन की प्राप्ति होती रहेगी। आर्थिक सफलता होते हुए भी सम्पत्ति क्षय का भी भय बना रहेगा। व्यक्तित्व आत्मनिर्भर होगा।

Thursday, June 20, 2013

चेप्टर-000001- ज्योतिष शास्त्र की प्रारम्भिक बाते

.....यहाँ पर ज्योतिष शास्त्र की प्रारम्भिक बाते लिखी जा रही है . आकाश की ओर दृष्टि डालते ही मानव मन में एक जिज्ञासा उत्पन्न होती है कि यह ग्रह , नक्षत्र , क्या है, तारे टूट कर क्यों गिरते है . सूर्य प्रतिदिन पूर्व में ही क्यों उदय होता है . मानव स्वभाव ही कुछ ऐसा है कि वह जानना चाहता है कि ' क्यों ? कैसे ? क्या हो रहा है ? क्या होगा ? मानव केवल प्रत्यक्ष बातों को जान कर ही संतुष्ट होता बल्कि जिन बातों से प्रत्यक्ष लाभ होने की संभावना नहीं है , उनको जानने के लिए भी उत्सुक रहता है .
..... मनोवैज्ञानिक दृष्टि से विश्लेषण करने से ज्ञात होता है कि, मानव की इसी जिज्ञासा ने उसे ज्योतिष शास्त्र के गंभीर रहस्य का उदघाटन करने के लिए प्रेरित किया .
..... ज्योतिष शास्त्र की व्युतपत्ति " ज्योतिषां सूर्यादिग्रहाणां बोधकं शास्त्रं "... अर्थात , सूर्यादि ग्रह और काल का बोध करने वाले शास्त्र को ज्योतिष शास्त्र कहा जाता है . इसमें प्रधानत: ग्रह, नक्षत्र , धूमकेतु , आदि ज्योति: पदार्थों का स्वरुप , संचार, परिभ्रमण काल, ग्रहण और स्थिति आदि समस्त घटनाओं का निरूपण एवं इनके संचारानुसार शुभाशुभ फलों का कथन किया जाता है.
..... भारतीय ज्योतिष की परिभाषा - भारतीय ज्योतिष की परिभाषा के स्कंध त्रय - १- सिद्धांत, २- होरा , ३- संहिता बाद में शोधोपरांत स्कंध पञ्च- सिद्धांत , होरा, संहिता, प्रश्न और शकुन यह पांच अंग माने गए है .
..... यदि विराट रूप में लिया जाय तो विज्ञान का १- मनोविज्ञान २- जीव विज्ञान ३- पदार्थ ( भौतिक ) विज्ञान , ४- रसायन विज्ञान , ५- चिकित्सा विज्ञान भी इसी के अंतर्भूत है.
.....मनुष्य स्वभाव से ही अन्वेषक प्राणी है , वह सृष्टि की प्रत्येक वस्तु के साथ अपने जीवन का तादात्म्य स्थापित करना चाहता है , उसकी इसी प्रवृत्ति ने ज्योतिष के साथ जीवन का सम्बन्ध स्थापित करने के लिए प्रेरित किया और बाध्य किया .
.....समस्त भारतीय ज्ञान की पृष्ठभूमि दर्शन शास्त्र है यही कारण है कि भारत अन्य प्रकार के ज्ञान को दार्शनिक मापदंड द्वारा मापता है . भारतीय दर्शन के अनुसार आत्मा अमर है , इसका कभी नाश नहीं होता , आत्मा केवल कर्मों के अनादि प्रवाह के कारण पर्यायों को बदला करता है .
.....अध्यात्मशास्त्र के अनुसार दृश्य सृष्टि केवल नाम रूप या कर्म रूप ही नहीं है , इस नाम रूपात्मक आवरण के लिए आधारभूत एक अरूपी , स्वतंत्र और अविनाशी आत्मतत्व है , और प्राणीमात्र के शरीर में रहने वाला यह तत्व नित्य एवं चैतन्य है , केवल कर्म-बंध के कारण वह परतंत्र और विनाशशील दिखाई देता है .
.....वैदिक दर्शन में कर्म के , १- संचित ,२- प्रारब्ध और ३- क्रियमाण यह तीन भेद माने गए हैं . किसी के द्वारा वर्तमान क्षण तक किया गया जो कर्म है , ( चाहे वह इस जन्म में किया गया हो या पूर्व जन्म में ) वह सब संचित कहा जाता है . अनेक जन्म जन्मान्तरों के संचित कर्मों को एक साथ भोगना संभव नहीं है , क्योंकि इनसे मिलने वाले फल परस्पर विरोधी होते हैं. अत: इन्हें एक के बाद एक भोगना पडता है . संचित में से जितने कर्मों का फल पहले भोगा जाता है उसे ही प्रारब्ध कहते हैं. यहाँ इतना ध्यान रखें कि , समस्त संचित का नाम प्रारब्ध नहीं है , बल्कि जितने भाग का भोग शुरू हो गया है वह प्रारब्ध है .जो कर्म अभी (वर्तमान ) किया जा रहा है, वह क्रियमाण है .इस प्रकार इन तीन तरह के कर्मों के कारण आत्मा अनेक जन्मों - पर्यायों को धारण कर संस्कार अर्जन करता चला आ रहा है .
.....आत्मा के साथ अनादिकालीन कर्म-प्रवाह के कारण " लिंग शरीर + कार्मण शरीर और भौतिक स्थूल शरीर का सम्बन्ध है. जब एक स्थान से आत्मा भौतिक शरीर का त्याग करता है तब लिंग शरीर, आत्मा को अन्य स्थूल शरीर की प्राप्ति में सहायक होता है. स्थूल भौतिक शरीर में यह विशेषता है कि इसमें प्रवेश करते ही आत्मा जन्म-जन्मान्तरों के संस्कारों की स्मृति को खो देता है . इसीलिये हमारे ऋषियों ने प्राकृतिक ज्योतिष के आधार पर कहा है कि , आत्मा मनुष्य के वर्तमान शरीर में रहते हुए भी एक से अधिक जगत के साथ सम्बन्ध रखता है . मनुष्य का भौतिक शरीर मुख्य रूप से , १- ज्योति: ,२- मानसिक ,३- पौद्गलिक ( पौदगलिक) , इन तीन उप शरीरों में विभक्त है . इसमें से ज्योति: नामक उप शरीर एस्ट्रालस बाडी ( Astrals Body) द्वारा नाक्षत्र जगत से , मानसिक उप शरीर द्वारा मानसिक जगत से और पौद्गलिक उप शरीर द्वारा भौतिक जगत से संबद्ध है . अत: मनुष्य प्रत्येक जगत से प्रभावित होता है . मनुष्य अपने भाव , विचार और क्रिया द्वारा प्रत्येक जगत को प्रभावित करता है . मनुष्य के वर्तमान शरीर में ज्ञान , दर्शन , सुख , दुःख , वीर्य आदि अनेक शक्तियों का धारक आत्मा सर्वत्र व्यापक है , तथा शरीर प्रमाण रहने पर भी अपनी चैतन्य क्रियाओं द्वारा विभिन्न जगतों में अपना कार्य करता है . हमारे ऋषियों ने व आधुनिक मनोवैज्ञानिकों ने आत्मा की इस क्रिया की विशेषता के कारण ही मनुष्य के व्यक्तित्व को बाह्य और आतंरिक दो भागों में विभक्त किया है .
.....( १ ) बाह्य व्यक्तित्व - वह है जिसने इस भौतिक शरीर के रूप में अवतार लिया है . यह आत्मा की चैतन्य क्रिया की विशेषता के कारण अपने पूर्व जन्म के निश्चित प्रकार के विचार , भाव और क्रियाओं की ओर झुकाव रखता है तथा इस जीवन के अनुभवों के द्वारा इस व्यक्तित्व के विकास में वृद्धि होती है और धीरे धीरे विकसित होकर आंतरिक व्यक्तित्व में मिलने का प्रयास करता है .
.....( २ ) आतंरिक व्यक्तित्व - वह है जो अनेकों बाह्य व्यक्तित्वों की स्मृतियों , अनुभवों और प्रवृत्तियों का संश्लेषण अपने अंदर रखता है .
..... बाह्य और आतंरिक व्यक्तित्व इन दोनों व्यक्तित्व संबंधी चेतना के , ज्योतिष में तीन रूप माने गए हैं. बाह्य व्यक्तित्व के तीन रूप , आतंरिक व्यक्तित्व के इन तीन रूपों से संबद्ध हैं , परन्तु आतंरिक व्यक्तित्व के ये तीन रूप अपनी निजी विशेषता और शक्ति रखते हैं, जिसके कारण मनुष्य के भौतिक , मानसिक और आध्यात्मिक इन तीनों जगतों का संचालन होता है . मनुष्य का अंत:करण इन दोनों व्यक्तित्वों के उपरोक्त तीनों रूपों को मिलाने का कार्य करता है . दूसरे दृष्टिकोण से यह कहा जा सकता है कि , ये तीनों रूप एक मौलिक अवस्था में आकर्षण और विकर्षण की प्रवृत्ति द्वारा अंत:करण की सहायता से संतुलित रूप को प्राप्त होते हैं. तात्पर्य यह है कि आकर्षण की प्रवृत्ति बाह्य व्यक्तित्व को और विकर्षण की प्रवृत्ति आतंरिक व्यक्तित्व को प्रभावित करती है , और इन दोनों के बीच में रहने वाला अंत:करण इन्हें संतुलन प्रदान करता है . मनुष्य की उन्नति और अवनति इन्हीं दोनों के संतुलन के पलड़े पर ही निर्भर है . .....मानव जीवन के बाह्य व्यक्तित्व के तीन रूप , और आतंरिक व्यक्तित्व के तीन रूप , तथा एक अंत:करण , इन सात के प्रतीक सौर जगत के सात ग्रह माने गए हैं . उपरोक्त सात रूप सभी प्राणियों के एक जैसे नहीं होते हैं, क्योंकि जन्म - जन्मान्तरों के संचित और प्रारब्ध कर्म विभिन्न प्रकार के हैं , अत: प्रतीक रूप ग्रह अपने अपने प्रतिरूप के सम्बन्ध में विभिन्न प्रकार की स्थितियाँ प्रकट करते हैं.
..... आधुनिक वैज्ञानिक प्रत्येक वस्तु की आतंरिक रचना सौर-मंडल से मिलती जुलती बताते हैं. उन्होंने परमाणु के सम्बन्ध में अन्वेषण करके बताया है कि , प्रत्येक पदार्थ की सूक्ष्म रचना का आधार परमाणु है . इसे यूँ भी कहा जा सकता है कि परमाणु की ईंटों को जोड़कर पदार्थ का विशाल महल निष्पन्न होता है, और यह परमाणु सौर जगत के सामान आकार प्रकार वाला है . इसके मध्य में एक धन ( + ) विद्युत का बिंदु है , जिसे केंद्र कहते हैं .इसका व्यास एक इंच के १० लाखवें भाग का भी १० लाखवाँ भाग बताया गया है . परमाणु के जीवन का सार इसी केंद्र में बसता है . इसी केंद्र के चारों ओर अनेक सूक्ष्मातिसूक्ष्म विद्युत कण चक्कर लगाते रहते हैं , और यह केंद्र वाले धन ( + ) विद्युत कण के साथ मिलने का उपक्रम करते रहते हैं . इस प्रकार के अनंत परमाणुओं के समाहार का एकत्र स्वरुप हमारा शरीर है .
..... भारतीय दर्शन में भी " यथा पिंडे तथा ब्रह्मांडे " का सिद्धांत प्राचीन काल से ही प्रचलित है . कुल मिला कर तात्पर्य है कि , वास्तविक सौर जगत में सूर्य , चंद्र , आदि ग्रहों के भ्रमण करने में जो नियम काम करते हैं , वही नियम प्राणीमात्र के शरीर में स्थित सौर जगत के ग्रहों के भ्रमण करने में भी काम करते हैं . अत: आकाश स्थित ग्रह , शरीर स्थित ग्रहों के प्रतीक हैं. 

Wednesday, June 19, 2013

मानव जीवन के लिए ज्योतिष आवश्यक क्यों ?

मानव जीवन और ज्योतिष का अभिन्न सम्बन्ध है , ज्योतिष विज्ञान का एकमात्र लक्ष्य मानव की आत्मा का विकास करके , उसे परम तत्व में निहित कर देना , या दूसरे शब्दों , मानव को दैहिक , दैविक , भौतिक इन त्रय तापों से रक्षित करना . दर्शन , सांख्य , विज्ञान आदि सभी का एक मात्र ध्येय विश्व की गूढ़ पहेली को सुलझाना एवं मानव जीवन को सामर्थ्यवान व सुखमय बनाना है...ज्योतिष भी विज्ञान होने के कारण इस अखिल ब्रह्माण्ड के रहस्य को उजागर करने का प्रयत्न करता है ...मनुष्य का वर्तमान जीवन उसके पूर्व संकल्पों , कामनाओं और कृत्यों का परिणाम है . तथा इस जीवन में वह जैसे कृत्य आदि करता है उसे वैसा ही परिणाम मिलता है ...पूर्ण प्राणमय, मनोमय, प्रकाशरूप , एवं समस्त कामनाओं और विषयों के अधिष्ठान भूत ब्रह्म का साक्षात ज्योतिष विज्ञान के सहयोग से शीघ्र मिलता है ... संक्षिप्त में इसलिए ज्योतिष मानव जीवन के लिए आवश्यक है.....