Tuesday, July 31, 2018

सन् 2018 में शेयर बाजार को प्रभावित करने वाले विशिष्ट ग्रह योग
जनवरी
    मासारम्भ में शुक्र व बुध के प्रभावी होने से बाजार का रूख कुछ गरम रहेगा। मारूती, रिलायंस जीयो, अम्बूजा सीमेन्ट, बजाज फाइनेन्सरी, महिन्द्रा एण्ड महिन्द्रा, हुण्डई आदि के शेयर्स तेज होगें। परन्तु निवेशक शीघ्र फायदा उठायें यह अल्प कालिक योग है। माह के दूसरे सप्ताह प्रथम चार दिनों शुक्र का प्रभाव बना रहेगा अतः  टेक्सटाइल, नोकिया, सैमसंग, रिलायंस ग्रुप, बैक आफ बड़ौदा, एस.बी. आई, महिन्द्रा कोटक बैंक, व टाटाग्रुप आदि के शेयरों में मजबूती देखने को मिलेगी। इस सप्ताह के अंत में सूर्यदेव की मकर संक्रान्ति 30 मुहूर्ती साम्यर्घ पड़ेगी जो शेयर मार्केट में स्थिरता ले आयेगी यह समय खरीदारी का उपयुक्त समय है, बैकिंग, दवा आदि बनाने वाली कम्पनीयों के शेयर, रिलांयस जीयो, इलेक्ट्रानिक, ऐजुकेशन, कन्सट्रॅक्शन से जुड़ी कम्पनीयों, आई.टी., माइक्रोसाफ्ट, विप्रो, सोनी, टाटा ग्रुप मे निवेश करे लाभ होगा। तीसरे सप्ताह मे अमावस्या की वृद्धि होगी अतः बाजार में सभी शेयर्स मसलन रिलायंस, आई.सी.आई.सी.आई, विप्रो, पेंन्ट बनाने वाली कम्पनीयों आदि इण्डस्ट्री के शेयर्स, कोल्डडिं्रक कम्पनियां, निफ्टी, डाउजोन्स, नेरोलैक, काफी, सीमेन्ट बनाने वाली कम्पनियों के शेयर्स मशीनरी व कम्प्यूटर्स आदि बनाने वाली कम्पनियों के शेयर्स, इलेक्ट्रॉनिक कम्पनियों के शेयर्स,आदि के शेयर्स में काफी अच्छी मंदी होके तेजी देखने को मिलेगी निवेशक इस स्थिति का फायदा अवश्य उठायें यह एक लाभकारी निवेश होगा। मासान्त मे गुरू व शनि के प्रभाव से मार्केट मे मंदी आना प्रारम्भ हो जायेगी यदि आप चाहे तो इस समय से पूर्व ही अपने शेयर्स निकाल सकते है। स्मालकैप, मिडकैप, निफ्टी, न.एस.सी., के लगभग सेसेंक्स को प्रभावित करने वाले शेयर्स के भावों मे मंदी आपको देखने को मिलेगी।
    फरवरी
    मासारम्भ में सूर्य व मंगल के प्रभावित होने से पूरे सप्ताह खरीदारी का एक योग रहेगा रिलायंस ग्रुप के लगभग सभी शेयर्स, बैकिंग सेक्टर मे एस.बी.आई, एच.डी.एफ.सी., कोटक महिन्द्रा, ईन्डस्ईन्ड, आई.सी.आई., बैंक आफ बड़ौदा, आदि एवं बिरला सनलाइफ, टाटा, सीफी, आदि के भावों में तेजी आयेगी। विदेशी कम्पनीयों के शेयर्स मे भी वृद्धि होगी। दूसरे सप्ताह मे सूर्यदेव की कुम्भ संक्रान्ति सोमवारी पड़ रही है, अतः रिलांयस इण्डस्ट्रीज के सभी शेयर्स, सीमेन्ट कम्पनीयों के शेयर्स, सीप्ला, डाबर, टाटास्टील, वीडियोकॉन, आईडिया, भारती एयरटेल, हिण्डालको , टी कम्पनीयों के शेयर मंदे हो जायेगें। तीसरे सप्ताह मे राहु व केतु का दुष्प्रभाव मार्केट मे पड़ने से मंदी ही बनी रहेगी अतः मिडकैप व सेंसेक्स को प्रभावित करने वाली कम्पनीयों के शेयरों में भी बिकवाली की आशंका है। इसमें एक तरफा मुनाफा कमा लेना निवेशकों के लिये उचित रहेगा। अन्यथा ऊपर के भावों मे फंसे रहना पड़ सकता है। मासान्त मे शुक्र व बुध का अच्छा प्रभाव शेयर मार्केट पर पड़ेगा अतः मारूति, हाण्डा, डेल, कैडबरी, आटो मोबाइल, तेल से सम्बन्धित कम्पनियों के शेयर्स अमेरिकी और एशियाई शेयर बाजार संवेदी सूचकांक आधारित कम्पनियां सत्यम विप्रो सैमसंग वीडियोकान आदि के शेयर्स तेज होगे, वही बैंकिग मे पी.एन.बी., विजया, एच.डी.एफ.सी, एस.बी.आई., युनियन बैंक आदि मे भी तेजी आयेगी। अन्नादि पदार्थों में तेजी आयेगी। एच.सी.एल, ओरियन्टल, हिन्डाल्को, हिन्दुजा, जीयो, नेस्डैक, नेस्लें, कैडबरी, आदि कम्पनियों के शेयर्स में अच्छा सुधार होगा। आप इस सप्ताह निवेश कर सकते है।
मार्च
    मासारम्भ के प्रथम सप्ताह में शुक्र व मंगल के प्रभाव से शेयर बाजार में तेजी का असर होने से म्यूच्युअल फंड, बजाज आटो एवं फाईनेन्स, पार्लें, फूड इण्डस्ट्रीज, भवन निर्माण सामग्री बनाने वाली कम्पनीयों के शेयर्स आदि में अच्छी तेजी आयेगी। एल.जी, सैमसंग, हुंडई आदि के शेयरों में भी तेजी का अच्छा योग बनेगा। दुसरे सप्ताह मे गुरू के वक्री होने से कुछ शेयर्स मे तो अच्छी तेजी आयेगी परन्तु कुछ के भाव गिर जायेगें। तेजी बिड़ला ग्रुप के शेयर्स, टेली मार्केटींग, एन.डी.टी.वी., हिण्डाल्को, जीयो आदि मे रहेगी।ं टेक्सटाइल, वीडियोकान, सैमसंग, एल.जी, एल.आई.सी., हॉण्डा, बजाज आटो, आदि शेयर्स मंदे रहेंगे। इसके उपरान्त सूर्यदेव की मीन संक्रान्ति 14 को पड़ेगी अतः नेस्लें, टिस्को, एस.बी.आई, सत्यम आदि के भाव सम रहेंगे। बैंकिंग के शेयरों में हल्की मंदी आकर बाद में तेजी आयेगी। ता.14 से 23 को मार्केट मे खरीदारी का अवसर है, निवेश करें। मशीनरी, वाहन आदि से जुड़े शेयर्स काफी तेज होंगे। सूचना प्रौद्योगिकी, वी.एस.एन.एल., एम.टी.एन.एल, लाल व सफेद रंग के पदार्थों में अच्छी तेजी देखने को मिलेगी। मासान्त मे बुध के वक्री हो जाने से विदेशी मुद्रा में बढ़त, ब्याज दरें मंदी हागी, बैंकिंग सेक्टर मे भी मंदी का असर देखने को मिलेगा, बैंकें एफ डी आदि पर ब्याज दरें घटा देगी। होम लोन, कार लोन, व्यापारी लोन सस्ते होगें। आई.टी, इलेक्ट्रॉनिक पार्ट बनाने वाली सभी कम्पनीयों के शेयर्स में तेजी का योग बनेगा। अर्थ व्यवस्था चरमारने का पूरे अंदेशा बनेगा परन्तु कुछ अच्छे सुझावों से कार्य बनेगा। कुछ वस्तुओं पर टैक्स छुटने परन्तु कुछ पर अधिक टैक्स लगाये जाने की स्थितिया बनेगी। व्यापार जगत मे कुछ नई कम्पनीया जगह बना ले जायेगी।
अप्रैल
     मासारम्भ मे बुध वक्रावस्था मे उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र के चतुर्थ चरण मे प्रवेश करेगा अतः अतः इस सप्ताह शेयरों में मन्दी का दौर चलेगा। सत्यम कम्प्यूटर, सोनी, हुण्डई, नोकिया, डेल, प्रकाश इण्डस्ट्रीज, टाटा ग्रुप के सभी शेयर्स व केमिकल्स नेरोलैक आई.सी.आई., रिलांयन्स ग्रुप, बजाज, टेल्को आदि कम्पनियों के शेयर्स गिर जायेगें। दुसरे सप्ताह मे सूर्य देव की मेष संक्रान्ति पड़ रही है अतः तेजी का योग बनेगा एल.जी.,डेल, भारती ऐयरटेल, सीप्ला, कैडबरी, गोडरेज, वोलटॉस, माइक्रोसाफ्ट, विप्रो, हीटाची, एशियाई कम्पनियां, प्लास्टिक की वस्तुएं बनाने वाली कम्पनियों के शेयर्स टेलीकाम एवं सौन्दर्य सामग्री उद्योग, लोहे एवं स्टील के उपकरण बनाने वाली कम्पनियों के शेयर्स मे किया हुआ निवेश लाभकारी रहेगा। ता. 15 को बुध माग्री होगा अतः कोल्डड्रिंक, सिगरेट चाय काफी नेरोलक आदि कम्पनियों के शेयर्स में सुद्दार होगा। वाहन केमिकल्स वित्तीय संस्थाओं के शेयर्स सामान्य रहेंगे पी.एन.बी, टाटा, जे.के.,ए.बी.एन.लॉयड, अविन्द मिल्स, बैंको मे सभी शेयर्स दवाई बनाने वाली कम्पनीयों के शेयर्स आदि के शेयर गिर जायेगें। मासान्त में मामूली गिरावट दर्ज की जाएगी। फूड इण्डस्ट्रीज, रेडीमेड गारमेन्ट्स कंपनियों के शेयर्स एवं सीमेन्ट तथा भौतिक वादी वस्तुओं को बनाने वाली कंपनियों के शेयर्स, वित्तीय शेयर्स, बैंक शेयर्स, जी-टीवी, टाटा-टी, रिलायंस के शेयर्स के भाव बढ़ेगें।
             मई
    मासारम्भ मे मकर के मंगल के प्रभावह होने के कारण शेयर बाजार हल्की मंदी का रूख तो दिखायेगा, परन्तु कुछ ही समय के उपरान्त बाजार में तेजी आयेगी परन्तु शेयर बाजार में अकस्मात् स्थिरता भी दिखाई दे सकती है। 8 से 13 तारीख मे बुध के प्रभावी होने के कारण रिलायंस इण्डस्ट्रीज, बिरला ग्रुप, विप्रो, डाबर, बैजनाथ, कोलगेट, आर.एस.पी.एल., फिल्म जगत से जुड़ी कम्पनीयों के शेयर्स, लारसेन, कोल इण्डिया, ब्रिटानिया,  डी.एल.एफ., हैवेल्स, हिंदुस्तान जिंक एवं मुख्यता सारी विदेशी कम्पनीयों के शेयर्स आदि में तेजी आयेगी। ता.14 को सूर्य देव की वृष संक्रान्ति पड़ेगी जिसके फलस्वरूप माह के तीसरे सप्ताह मे डाबर, रैनबैक्सी, मैरिको, एन.एच.पी.सी., ऑयल इण्डिया, सिप्ला, हिन्दुस्तान लीवर, पीडलाईट, पावरग्रिड, टेक महिन्द्रा आदि शेयरों में तेजी दिखाई देगी। ए.सी.सी, अम्बुजा सीमेंट, आई.पी.सी.एल, आई.बी.पी., इनफोसिस में कुछ उतार-चढ़ाव के मध्य बाजार में तेजी ही रहेगी। आटो मोबाइल, साफ्टवेयर से सम्बन्धित कम्पनियों में भी तगड़ी मंदी इस सप्ताह मे देखने को मिलेगी। मासान्त में बुद्द व सूर्य के मिले-जुले प्रभाव से दूर संचार, मीडिया, सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र से सम्बन्द्दित कम्पनियां, पुरानी अर्थव्यवस्था स जुड़े शेयरों में निवेश करना उचित है। स्टील, नेमलीन लाइट, व्यूजुअल, रिलायंस, एल.आई.सी.,आइ.सी.आई.सी.आई, यू.टी.आई, एच.डी.एफ.सी आदि के शेयर अच्छे उतार चढ़ाव के बाद तेजी ही लायेंगे। बैकिंग व रियल स्टेट से जुड़े शेयर्स गिरने की आशंका है।
जून
    मासारम्भ में शनिदेव अपनी वक्रावस्था मे प्रभावी रहेगें  अतः बाजार में तेजी का वातावरण दिखेगा, एच.सी.एल.टेक, कपड़े बनाने वाली कम्पनीयों के शेयर्स, बिरला सन लाईफ, रिलांयस जीयो, टिस्को, रिलायन्स, कम्प्यूटर, फूड इण्डस्ट्री शुगर इण्डस्ट्री औद्योगिक कम्पनियों के शेयर्स वित्तीय संस्थाओं के शेयर्स में तेजी आएगी। पेट्रोल, डीजल आदि के दाम भी बढ़ने की आशंका है। दुसरे सप्ताह मे चतुर्दशी का क्षय ऐप्पल, इन्टेल, माइक्रोसाफ्ट, विप्रो आदि में खासा तेजी देखने को मिलेगी, केमिकल्स गृहस्थ वस्तुओं को बनाने वाली कम्पनियों के शेयर्स, हिन्डाल्को हिन्दुजा एच.सी.एल. ओरिएन्टल, हिन्दुस्तान टेस्को, इण्डेन आदि कम्पनियों के शेयर्स में तेजी आयेगी। तीसरे सप्ताह मे नेप्च्यून के वक्री होने तथा सूर्यदेव की मिथुन संक्रान्ति पड़ने से मंदी आएगी,यह मंदी एन.एस.सी के मुख्य शेयर्स, आई.टी.सी. टेलीकॉम इण्डस्ट्री के शेयर्स में आयेगी। बिचौलिए बाजार में हावी रहेगें। बाजार में जबरदस्त उतार-चढ़ाव का माहौल रहेगा, कभी तेजड़िये तो कभी मंदड़िये हावी होंगे। मासान्त में मंगल के वक्री होने से साफ्टवेयर बनाने वाली, सीमेन्ट बनाने वाली, हेल्थ इक्युपमेन्ट बनाने वाली, कम्युटर गेम्स बनाने वाली, आटो मोबाइल सेक्टर, गोल्ट ज्वैलरी बनाने वाली   कम्पनियों के शेयर्स इस सप्ताह तेज होंगे। परन्तु इस सप्ताह कुछ कम्पनीयों के शेयर गिर भी जायेगें जिनमे बैंकिग सेक्टर, भवन निर्माण सामग्री, फनीर्चर, दवा, मशीनरी बनाने वाली कम्पनीया शामिल है।
जुलाई
    माह के पहले सप्ताह मे शुक्र के सिंह राशि मे प्रवेश होने से अधिकांश शेयरों में मंदी आने के उपरान्त तेजी आएगी। परन्तु बाजार के मूड को देखते हुए संस्थागत बिकवाली से अनिश्चितता का माहौल रहेगा। ए.सी.सी, अम्बुजा सीमेंट, श्री सीमेन्ट इन तीनो के शेयर आई.पी.सी.एल,कैडबरी, कोलगेट, कोल इण्डिया, टाटा पावर, अरविन्द मिल्स, नेस्लें, एस.बी.आई., एच.डी.एफ.सी. इनफोसिसनेट, ओरिएन्टल, हिन्डालको, हिन्दुजा, टिस्को, हिन्दुस्तान पेंटाफोर, इण्डेन आदि कम्पनियों के शेयर्स घट-बढ़ कर चलेंग अंत तेजी मे होगें। दूसरे सप्ताह मे गुरू के माग्री होने से अडानी पावर, अपोलो, अशोका लीलैण्ड, बाटा, बर्जर पेन्ट, भारत फोर्ज, भारत हैवी इलेक्ट्रीकल्स, कैस्ट्राल, बॉस, बायकॉन आदि के शेयर बढ़ेगें। तीसरे सप्ताह मे सूर्यदेव की कर्क संक्रान्ति बुद्दवासरीय पड़ेगी अतः सी.इ.एस.सी., आई.सी.आई बैंक, डालमिया भारत लिमिटेड, डीश टीवी, एक्साईड, जी.एम.आर., गोडरेज, ग्लेनमार्क, फार्मा, ईमामी लिमिटेड, आईसर मोटर्स, हेक्सावेयर, गुजरात स्टेट पेट्रोनेट, ईण्डियन बैंक, जे.एस.डब्लयू एनर्जी, जिन्दल स्टील आदि शेयर्स धीरे-धीरे बढ़ेगें। मासान्त मे बुध के वक्री होने से एल.एण्ड टी. जुबील्यन्ट फूड, जुबील्यन्ट लाईफ, एल.आई.हाउसिंग फाईनेन्स, मन्नापुरम फाईनेन्स, एम.आर.एफ., नैटको फार्मा, एन.एम.डी.सी., आयल एण्ड नेचुरल गैस, ओबेराय रियेलटी, एन.टी.पी.सी., आयुर्वेदिक दवायें बनाने वाली कम्पनी, सौन्दर्य प्रसाधन से जुड़ी कम्पनी, ईस्पात ईण्डस्ट्री, कन्ट्रक्शन ईण्डस्ट्री, कोल ईण्डस्ट्री, हेल्थ ईण्डस्ट्री आदि से जुड़ी कम्पनीयों के शेयर्स मे इस अंतिम सप्ताह मे तेजी देखने को मिलेगी। 
            अगस्त
    मासारम्भ में शुक्र के कन्या राशि मे प्रवेश करने से शेयर बाजार में उतार चढ़ाव के बाद अन्त में मंदी लायेगा सूचकांक(सेंसेंक्स) को प्रभावित करने वाले सारे शेयर्स के भाव गिरने लगेंगें। दूसरे सप्ताह मे हर्शल के वक्री हो जाने के कारण शेयर मार्केट मे आप इन शेयर्स मे निवेश करे मारूति, महिन्द्रा, जीयो, टाटा पावर, कैसट्राल, अपोलो    नेस्लें, आई.टी.सी., हिन्दुस्तान लिवर लिमिटेड, नोकिया, सिफी, भारती एयरटेल, हिन्डाल्को, इन्टेल, बैंकिग मे बैंक आफ इण्डिया, ईण्सईन्ड, देना, बी.ओ.बी., आई.सी.आई., कर्नाटका, युनियन, आदि।   तीसरे सप्ताह मे बुध के माग्री होने से मंदी पलटना शुरू होगी अधिकांश शेयर्स के भावों मे गिरावट देखने को मिलेगी। इसका खास असर सीमेन्ट कम्पनीयों, ऐजुकेशन सेक्टर से जुड़ी कम्पनीयों, आटोमोबाईल, आन लाईन ट्रेडिग करने वाली कम्पनीयों, मशीनरी से जुड़ी कम्पनीयों आदि मे देखने को मिलेगा। मासान्त में मंगल के माग्री होने से रिलांयस ग्रुप से जुड़े लगभग शेयर्स मंदे हो जायेगें, टाटा ग्रुप से जुड़े शेयर्स स्थिर हो जायेगें यह समय काफी समझदारी से निर्णय लेने वाला है। पिछले सप्ताह से चली आ रही मंदी मेडिकल, हार्डवेयर, बच्चों की वस्तुयें बनाने वाली कम्पनी, होम अपलायंस, कृषि के उपकरण बनाने वाली कम्पनीयों के शेयर्स, ट्रैवलिग सेक्टर से जुड़ी कम्पनीयों, लेदर ईण्डस्ट्रीज,  फाईनेन्स सेक्टर, बीमा करने वाली कम्पनीयों के शेयर्स, एच.पी., एच.सी.एल., वीप्रो, हुण्डई, नेस्लें, ब्रीटानीया काफी धीरे-धीरें पर तेज होगें। 
    सितम्बर
    मासारम्भ मे शुक्र का तुला राशि मे प्रवेश करेगा अतः बाजार धीमा रहेगा। ता.01 से लेकर 7 तक विदेशी कम्पनीयों, लेदर निर्यात से जुड़ी कम्पनीयों, खनन करने वाली कम्पनीयों एवं कम्यूटर के पार्ट बनाने वाली कम्पनीयों के शेयर्स मे गिरावट दर्ज की जायेगी,आई.टी, मेडिकल व ऐजुकेशन से जुड़ी कम्पनीयों के शेयर तेज होंगे इनमे निवेश करें। दुसरे सप्ताह शनि के माग्री होने का प्रभाव पड़ेगा मार्केट में अच्छा उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा परन्तु अंततः तेजी ही आयेगी कैडबरी, पार्ले, नेस्ले, कोल इण्डिया, टेफ्को, टाटा पावर, निफ्टी के मूख्य शेयर्स आदि के शेयरों में खासा उछाल देखने को मिलेगा, परन्तु इस सप्ताह बैकिंग सेक्टर, फाइनेन्स सेक्टर, बीमा करने वाली कम्पनीयों के शेयर्स गिर जायेगें। ता.17 को सूर्य देव की कन्या संक्रान्ति पड़ेगी, जिससे तेजी-मंदी का मिला जुला असर रहेगा। तेजी के रहते मंदी का एक झटका भी लगेगा इस बीच जो भी निवेश पड़े है उन्हे पड़ा रहने दें बाद मे बिकवाली करके लाभ अर्जित करें, इलेक्ट्रानिक उपकरण को बनाने वाली कम्पनीयों, वित्तीय कम्पनीयों, सप्लायर्स, एच.सी.एल. टेक, खाने पीने की वस्तुओं को बनाने वाली कम्पनीयों के शेयर्स में तेजी  आयेगी,मशीनरी, टेक्सटाइल, स्टेशनरी काफी, चाय आदि में भी तेजी ले आयेगा। मासान्त में निवेशक बैकिंग (एस.बी.आई., इण्डसईण्ड, कोटक बैंक, डी.बी.एस., आई.सी.आई.), टेलीकॉम (भारती एयरटेल, रिलायंस जीयो) एवं छोटे भाव के सभी शेयर्स मे निवेश करे ये सप्ताह लाभप्रद रहेगा। टेक्सटाइल, वीडियोकान, सैमसंग, माइक्रोसाफ्ट, रिलायंस ग्रुप से जुड़े सभी मुख्य शेयर्स, एल.आई.सी. लिमिटेड, टी.सी.एल, महिन्द्रा कोटक,टाटाग्रुप, टाटा टी, गोडरेज, ब्रिटानीया आदि शेयरों में मजबूती देखने को मिलेगी।
अक्टूबर
    मासारम्भ मे प्लूटो के माग्री होन से इंजीनियरिंग सेक्टर, आयॅल सेक्टर, टेक्सटाइल उद्योग, संचार मीडिया क्षेत्र से जुड़ी कम्पनियों, फैशन की वस्तुओं को बनाने वाली कम्पनीयों, हार्डवेयर, मशीनरी के पार्ट बनाने वाली कम्पनीयों के शेयर्स, मिडकैप, महिन्द्र एण्ड महिन्द्रा तथा लगभग सभी मोटर्स कम्पनियों के शेयरों मे वृद्धि होगी। बैंकिंग कम्पनियों के शेयरों में बिकवाली दबाव आने की आशंका है ये शेयर गिरेगें। दुसरे सप्ताह मे गुरू का वृश्चिक राशि मे प्रवेश होने से उपरोक्त सेक्टरों में एक बारगी बाजार नीचे भी आ सकता है, परन्तु बास, टी.एन.टी, पामोलिव, जुबिलीयन्ट, आटो स्टील पॉवर, मिड कैप, मेडिसिन से जुड़ी कम्पनियों, कन्ट्रक्शन सेक्टर, एयरलाईन्स, विदेशी कम्पनीयों के शेयर्स, वीप्रो, सीप्ला आदि तेज होगे पर कुछ समय के लिये। तीसरे सप्ताह मे सूर्यदेव की तुला संक्रान्ति पड़ने के कारण बाजार में हल्की गिरावट की आशंका प्रतीत होगी, शेयरों में स्पष्ट रूप से इस सप्ताह शेयर ब्रोकर बिकवाली का दबाव बनायेंगे परन्तु आपको हल्के धैर्य से निर्णय लेना है। पहले से पड़े हुए शेयर्स को रखकर चलना है। मासान्त मे शुक्र के प्रभावी हो जाने के कारण रिलायंस, बीमा कम्पनियां, इण्टरनेट से जुड़ी कम्पनियां, डाबर, ए.बी.एन. लायड,  डी.एस.ग्रुप, पामोलिव लिमिटेड, एल.आई.सी. लिमिटे, इनफोसिस, सिफी, नेस्ले, डेल, भेल आदि में अच्छी तेजी देखने को मिलेगी।
नवम्बर
    मासारम्भ मे मंगल के प्रभाव से बाजार में एक हल्का सा मंदी का लहरा आयेगा परन्तु वह स्थाई नहीं होगा मार्केट में तेजी कुछ समय बाद आने लगेगी, रिलायंस पावर, रिलायंस जीयो, रिलायंस इन्फ्रा, ए.बी.बी. लिमिटेड, ए.सी.सी. लिमिटेड, अजंता फार्मा, एशीयन पेन्ट, ईमामी, एक्साईड ईण्डसट्रीज, गेल, टिस्को, एस.बी.आई, सत्यम विदेशी बड़ी कम्पनियां, चाइनीज कम्पनियां, एच.सी.एल, हिन्डाल्को, रैनबैक्सी,इनफोसिस आदि कम्पनियों के शेयर्स में अच्छा सुधार होगा निवेशक खासा फायदा इन शेयर्स में उठा सकते हैं। दुसरे सप्ताह मे सूर्य के प्रभाव से सेंसेंक्स का प्रभावित करने वाले सभी शेयर्स के भाव एकाएक गिरते चले जायेंगे। अतः जो पहले तेजी के सौदे करके आये हैं उन्हें 16 तारीख के पूर्व बेचकर मन्दी में आ जायें तभी बेहतर रहेगा। इस सप्ताह में बाजार की गति ऊँचे और नीचे दोनों भावों में अच्छी देखने को मिलेगी। तारीख 16 को सूर्यदेव की वृश्चिक संक्रान्ति पड़ेगी, अद्दिकांश शेयरों में घटा-बढ़ी पूरे माह चलती रहेगी। औद्योगिक कम्पनियों के शेयर्स में विशेष उछाल आएगा,इस समय आप तेजी का लाभ उठा सकते है। वहीं मुख्य शेयरो के बढ़ने के कारण सेंसेक्स मे भी बढ़त दिखेगी। मासान्त में नेप्च्यून के माग्री होने से ए.सी.सी., अम्बूजा सीमेन्ट, बिलि्ंडग मैटिरियल बनाने वाली कम्पनीयों के बैंकों के शेयर्स आदि में अच्छी मजबूती देखने को मिलेगी। आप इस माह मे रिलांयस ग्रुप, टाटा ग्रुप, कैडबरी, नेस्लें हिण्डाल्कों, रैनबैक्सी मिडिया संचार कम्पनीयों के बैंकों के शेयर्स खरीद सकते है,लाभ होगा।
दिसम्बर
    मासारम्भ के प्रथम सप्ताह मे बुध के माग्री होन से बाजार का रूख कुछ गरम रहेगा, विशेषकर बैकिंग शेयर्स,स्टील,चाय,काफी तम्बाकू बैंक टेक्सटाइल मिल्स व आई.टी. शेयर्स में तेजी आएगी। अधिकांश शेयर्स में तेजी बनी रहेगी, हीरो टोयोटा, रिलायंस ग्रुप, हाण्डा, बजाज, सुजुकी, महिन्द्रा एण्ड महिन्द्रा, हुण्डई, मारूति, टाटा ग्रुप से जुड़े शेयर्स आदि तगड़ी तेजी का रूख दिखायेंगे। दुसरे सप्ताह मे गुरू के प्रभाव से मंदी का हल्का असर दिखा के तेजी आयेगी कुछ मध्यम गति से चलने वाले इन शेयर्स जैसे रैनबैक्सी, सैमसंग, विप्रो, आदित्य बिड़ला ग्रुप के शेयर्स, डी.एल.एफ., एच.सी.एल., हिंडाल्को, डा.रेडीस, कोल्डडिं्रक, डा.लैब्स अच्छे तेज हांगे। तीसरे सप्ताह मे सूर्य देव की धनु संक्रान्ति पड़ेगी अतः युनियन बैंक, विजया, व आई.सी.आई.,पी.एन.बी., आई.डी.बी.आई, एच.डी.एफ.सी, वीडीयोकॉन, न.टी.पी.सी.हिन्दुस्तान लीवर लिमिटेड, माइक्रोसाफ्ट, विप्रो, नोकिया, आईडीया, फेसबूक, एस.सी.एल., नेरोलैक, काफी, चाय बनाने वाली कम्पनियों के शेयर्स मशीनरी कम्प्यूटर्स आदि बनाने वाली कम्पनियों के शेयर्स, इलेक्ट्रानिक कम्पनियें के  शेयर्स, नोकिया, एल.जी., आदि के शेयर्स में काफी अच्छी तेजी देखने को मिलेगी निवेशक इस स्थिति का फायदा अवश्य उठायें यह एक लाभकारी निवेश है। मासान्त मे रिलायन्स आल ग्रुप, केमिकल्स, टाटाग्रुप, बैकिंग, हिदुस्तान जिंक, कोल ईण्डिया, पार्ले, गेल तेज होगें।
   नोटः- यद्यपि इस जन्त्री  में प्रत्येक लेख लिखते समय ज्योतिषशास्त्र को आधार मानकर लिखा गया है। फिर भी निवेशकों को एवं व्यापारियों को चाहिये वे बुद्धि से कार्य करें। किसी भी हानि के लिये सम्पादक-लेखक प्रकाशक कतई जिम्मेदार न होंगे। किसी भी विवाद का निपटारा कानपुर न्यायालय के अन्तर्गत मान्य होगा।
लेखक- पं. विजय त्रिपाठी ‘विजय’

Friday, February 17, 2017

वास्तु शास्त्र पर एक शोध लेख

 धर्मशास्त्रीय निर्देशों के अनुसार ‘वास्तु पूजा प्रकुर्वीत ग्रहारम्भे प्रवेशे च’ अर्थात् भूमि का परीक्षण एवं पूजन अवश्य करना चाहिए। वर्तमान समय में जनमानस का रूझान (वास्तु-शास्त्र) की ओर बढ़ा है। यहाँ तक कि विदेशों में भी वास्तु पर शोध होकर भवनों का निर्माण होने लगा है यदि निवास अथवा ‘व्यापारिक स्थान’ बनाने के पूर्व ‘वास्तु-शास्त्र’ के निर्देशों पर ध्यान दें लें तो जीवन ऐश्वर्यमय  एवं सुख-शांति से व्यतीत होगा। इसमें कोई संदेह नहीं है।
 वास्तु शास्त्र के अनुसार भवन-निर्माण करने से पूर्व शिलान्यास करना चाहिए जिस दिशा में शिलान्यास किया जाता है, उसका विचार सूर्य संक्रान्ति के आधार पर दो दिशाओं के    मध्य भाग (कोण) के अन्तर्गत किया जाता है। शिलान्यास के लिये पाँच शिलाओं का स्थापन करना चाहिए। स्थापन से पूर्व यथासम्भव देवार्चन एवं शिला-पूजन करना चाहिए। भवन-निर्माण के लिए यह आवश्यक है कि दीवार सीधी और एक आकृति वाली होनी चाहिए, कहीं से मोटी और कहीं से पतली दीवार होने से उसका प्रभाव गृहस्वामी के लिए कष्टप्रद होता है। भवन में कक्षों के अर्न्तगत रोशनी और हवा का ध्यान रखते हुए खिड़कियों तथा सामान आदि के लिये अलमारी अवश्य करना चाहिए।
 प्लाट के चारों ओर खाली स्थान छोड़ना चाहिए, जिसमें पूर्व और उत्तर दिशा में अधिक खाली स्थान रखकर गैराज व लान का प्रयोग शुभकारक होता है। भवन-निर्माण में उत्तर एवं पूर्व दिशा में भूखंड का खाली स्थान दक्षिण एवं पश्चिम दिशा की अपेक्षा अधिक रहना श्रेयस्कर होता है। भवन-निर्माण के समय उसकी आकृति का ध्यान रखना अति आवश्यक है। प्रायः भवनों के निम्नलिखित आकार का फल इस प्रकार है-
1. आयताकार  सभी प्रकार की प्राप्ति
2. चतुरान्न  धन-वृद्धि
3. भद्रासन  जीवन में सफलता
4. गोलाकार  ज्ञान एवं स्वास्थ्यवर्धक
5. चक्राकार  निर्धनता
6. त्रिकोणाकार  राजभय
7. शंक्वाकार  धनहानि, रोगकारक, मृत्युभय, दण्डादि
8. विषम भुजाकार मानसिक परेशानियाँ
9. दण्डाकार  पशुहानि
10. पणवाकार  नेत्रपीड़ा एवं गृह हानि
11. भुजाकार  स्त्रियों के लिए कष्ट एवं हानि
12. वृहद् मुखाकार पारिवारिक हानि, भ्रातृ-कलह
13. व्यंजनाकार (पंखा) धन-हानि एवं जीव हिंसा
14. कूर्म पृष्ठाकार शत्रुता, मृत्यु, हिंसा, अवनतिकारक
15. धनुषाकार  विविध परेशानियाँ, चोट एवं शत्रुभय
16. शूपाकार  सामान्य एवं कष्टकारक
वास्तु शास्त्र में 16 कक्षों की निर्धारित दिशाओं में निम्न प्रकार से कक्षों को स्थापित करना चाहिए। मुहूर्त चिंतामणि के अनुसार-पूर्व में स्नानागार, आग्नेय में रसोई, दक्षिण में शयन कक्ष, नैऋर्त्य में विश्राम कक्ष, पश्चिम में भोजन कक्ष, वायव्य में अन्न संग्रह, उत्तर में धनागार, ईशान में पूजास्थल, पूर्व एवं आग्नेय के मध्य में आग्नेय एवं दक्षिण के मध्य घृत संग्रह, दक्षिण और नैऋर्त्य के मध्य शौचालय, नैऋर्त्य और पश्चिम के मध्य अध्ययन कक्ष, पश्चिम के मध्य दण्डाकार, उत्तर-पश्चिम के मध्य शयन कक्ष, अविवाहित संतानों के लिए उत्तर एवं ईशान के मध्य औषद्द कक्ष, पूर्व एवं ईशान के मध्य स्वागत एवं सार्वजनिक कक्षों का निर्माण का उल्लेख है।
 भवन में विभिन्न कक्षों की स्थिति वास्तु के अनुसार इस प्रकार होनी चाहिए। पूजा कक्ष, भवन का मुख्य अंग है। पूजन, भजन, कीर्तन, अध्ययन-अध्यापन कार्य सदैव ईशान कोण में होना चाहिए। पूजास्थल से मानसिक शांति, बुद्धि शुद्धि, मन पर शुद्ध संस्कार प्रभाव डालते हैं। पूजा करते समय व्यक्ति का मुख पूर्व में होना चाहिए, ईश्वर की मूर्ति का मुख पूर्व, पश्चिम व दक्षिण की ओर होना चाहिए। ब्रह्मा, विष्णु, शिव, इन्द्र, सूर्य, कार्तिकेय का मुख पूर्व या पश्चिम की ओर होना चाहिए। गणेश, कुबेर, दुर्गा, भैरव, षोडश,मातृका का मुख सदैव दक्षिण की ओर होना चाहिए। हनुमान जी का मुख नैऋत्य कोण की ओर होना चाहिए, पूजास्थल अन्य किसी कोण में बनाना उचित नहीं है। फैक्ट्री, मिल या इण्डस्ट्री के ईशान कोण में मंदिर अथवा आराद्दना-स्थल का निर्माण करना चाहिए। स्वागत कक्ष, अतिथि गृह, पीने का पानी, यह सभी ईशान कोण की ओर रखना शुभ होता है।
 रसोईघर- भवन में रसोईघर आग्नेय कोण या पूर्व या आग्नेय के मध्य या पूर्व में बनाना चाहिए। रसोईघर में चूल्हा या गैस आग्नेय कोण में रखें। ताजी हवा का पंखा उत्तर व पूर्व दिशा में लगायें।
 भोजनालय - प्राचीन काल में भोजन रसोईघर में ही किया जाता था, परन्तु वर्तमान में भोजन के लिए अलग कक्ष की स्थापना की जाती है। बहुधा स्थानाभाव में भोजन कक्ष ड्रांइगरूम के एक भाग में बना लिया जाता है। डायनिंग टेबल ड्रांइगरूम के दक्षिण-पूर्व में रखनी चाहिए अथवा भोजन कक्ष में भी दक्षिण-पूर्व में रखनी चाहिए। भोजनालय या भोजन कक्ष भवन में पश्चिम या पूर्व दिशा में बनाना चाहिए।
 भण्डारगृह अथवा स्टोर- प्राचीनकाल में पूरे वर्ष के लिये अन्नादि का संग्रह किया जाता था। इसलिए भवन में भण्डार-गृह की अलग व्यवस्था होती थी परन्तु वर्तमान में स्थानाभाव के कारण रसोईघर में खाद्यान्न रख लिया जाता है। खाद्यान्न रसोईघर में ईशान और आग्नेय कोण के मध्य पूर्वी दीवार के सहारे रखना चाहिए। यदि स्थान उपलब्ध है तो भवन के ईशान और आग्नेय कोण के मध्य पूर्वी भाग में भण्डार-गृह का निर्माण करना श्रेष्ठ होता है।
 शौचालय - वास्तु नियमों के आधार पर शौचालय हेतु नैऋर्त्य कोण व दक्षिण कोण के मध्य या नैऋत्य कोण व पश्चिम दिशा के मध्य स्थान सार्वाधिक उपयुक्त है। शौचालय में शीट इस तरह रखी जानी चाहिए कि बैठते समय उसका मुख दक्षिण या पश्चिम की ओर हो। पानी का बहाव उत्तर-पूर्व में रखें। उत्तरी व पूर्वी दीवार के साथ शौचालय न बनावायें।
 स्नानगृह - वास्तु नियमों के अनुसार, स्नानागृह भवन के पश्चिम-दक्षिण दिशा के मध्य अथवा नैऋत्य कोण व पश्चिम दिशा के मध्य होना चाहिए। मतान्तर में पूर्व में रखें। आधुनिक स्नानागृह में गीजर इत्यादि की भी व्यवस्था होती है। गीजर आदि का संबंद्द अग्नि से होने के कारण सदैव आग्नेय (दक्षिण-पूर्व) में लगाना चाहिए। स्नानागृह व शौचालय के लिए अलग-अलग स्थान सुनिश्चित किया जाना चाहिए। परन्तु स्थान सीमित होने के कारण ऐसा संभव न हो और स्नानागृह तथा शौचालय एक साथ बनाना पड़े तो भवन के दक्षिण-पश्चिम भाग में या वायव्य कोण में बनाना चाहिए। यदि कोई विकल्प न मिले तो आग्नेय कोण में शौचालय बनाकर उसके साथ पूर्व की ओर स्नानागृह समायोजित कर लेना चाहिए। यह ध्यान रखें कि स्नानागृह व शौचालय नैऋर्त्य कोण व ईशान कोण में कदापि न बनवायें, वैसे जहाँ तक संभव हो, ये अलग-अलग भाग में या वायव्य कोण में बनाने चाहिए।
 शयनकक्ष- भवन में शयन कक्ष दक्षिण या पश्चिम दिशा में होना चाहिए। सोते समय सिर दक्षिण दिशा में, पैर उत्तर दिशा में होना चाहिए। ऐसा होने को सोने वाले को शांति व गहरी नींद आती है। घर में सुख-समृद्धि व धन-धान्य की वृद्धि होती है। यदि दक्षिण दिशा में सिरहाना रखना संभव न हो तो सिरहाना पश्चिम दिशा की ओर होना चाहिए। अन्य दिशाओं में सिरहाना रखने से मन शान्त नहीं होता है।
 अध्ययन कक्ष- वास्तु नियमों के अनुसार वायव्य, नैऋत्य कोण और पश्चिम दिशा के मध्य अध्ययन कक्ष बनाना श्रेष्ठ होता है। ईशान कोण में पूर्व दिशा में पूजागृह के साथ भी सर्वोत्तम होता है।
 पानी की टंकी-  भवन की छत पर पानी की टंकी बनाने हेतु भव्य व उत्तर दिशा के मध्य या वायव्य व पश्चिम दिशा के मध्य का स्थान शुभ होता है। भूमिगत पानी की टंकी के लिए ईशान कोण सर्वोत्तम होता है।
 जल प्रवाह- भवन निर्माण के समय जलप्रवाह का विशेष ध्यान रखना चाहिए। वास्तु नियम के अनुसार समस्त जलप्रवाह पूर्व, वायव्य, उत्तर और ईशान कोण में रखना शुभ है। जल उत्तर-पूर्व व उत्तर-पश्चिम कोण से घर के बाहर निकलना चाहिए। वास्तु के अनुसार पूर्व दिशा में जल निकास शुभ, उत्तर दिशा में द्दन-लाभ, दक्षिण दिशा में रोग व कष्ट, पश्चिम में धन हानिकारक है। जल का निकास ईशान, उत्तर और पूर्व दिशा में शुभ होता है। अर्थात् भवन का समस्त जलप्रवाह पूर्व, वायव्य, उत्तर और ईशान दिशा में रखना शुभ होता है। भवन के पूर्व दिशा में  नाली निकालने का मार्ग वृद्धिदायक, उत्तर दिशा में अर्थलाभ, दक्षिण दिशा की ओर रोग, पीड़ा एवं पश्चिम दिशा की ओर धन हानि होती है। अतः वास्तुशास्त्र नियमों के अनुसार जल का प्रवाह उत्तर-पूर्व (ईशान) पूर्व-उत्तर दिशा की ओर ही रखना चाहिए।
 आँगन- भवन का केन्द्रीय स्थल ब्रह्मस्थान कहलाता है। प्राचीन समय में ब्रह्मस्थान आंगन (चौक) होता था। वर्तमान में स्थानाभाव के कारण आंगन का प्रावधान खत्म होता जा रहा है। भवन के मध्य में आंगन या खुलास्थान इस प्रकार उत्तर या पूर्व की ओर रखें जिससे सूर्य का प्रकाश अधिकाधिक प्रविष्ट हो आंगन मध्य मेंं ऊँचा और चारों ओर नीचा हो तो शुभ एवं मध्य में नीचा और चारों और ऊँचा हानिकारक होता है।
 पशुशाला- वास्तु के आधार पर गौशाला अथवा पशुशाला के लिए भवन में उत्तर-पश्चिम दिशा और अर्थात् वायव्य कोण का स्थान शुभप्रद होता है।
 बालकनी- हवा, धूप व भवन के सौन्दर्य के लिए बालकनी का विशेष महत्व है। वास्तु के आधार पर यदि भूखण्ड पूर्वोन्मुख है तो बालकनी उत्तर-पूर्व यदि भूखण्ड पश्चिमोन्मुख है तो बालकनी का स्थान-सा चयन करते समय ध्यान रखें कि सूर्य का प्रकाश एवं प्राकृतिक हवा का प्रवेश भवन में होता रहे।
 गैराज- वास्तु के अनुसार गैराज भवन के दक्षिण-पूर्व या उत्तर-पश्चिम दिशा में बनाना चाहिए।
 विद्युत एवं प्रकाश- भवन निर्माण के समय विद्युत एवं प्रकाश का विशेष ध्यान रखना चाहिए। बिजली का मेन स्विच बोर्ड, भवन के दक्षिण भाग में लगवाना चाहिये। कक्ष में प्रवेश करते समय दाहिने हाथ की ओर बिजली का बोर्ड लगवाना चाहिये। बायीं ओर अशुभकारक होता है। भवन के प्रत्येक कक्ष का निर्माण इस तरह करवाना चाहिये कि सूर्य की किरणें निर्बाध प्रवेश करें। स्वास्थ्य एवं भवन की सुरक्षा के लिये सूर्य का प्रकाश व वायु संचारण का विशेष ध्यान रखना चाहिये। प्रदूषित वायु को बाहर निकालने के लिये एक्जास्ट आदि का सही दिशा में निर्धारण करना चाहिए।
 सोपान या सीढ़ी- वास्तु के अनुसार सीढ़ियों का द्वार पूर्व व दक्षिण दिशा में शुभ होता है। यदि सीढ़ियाँ घुमावदार बनवानी हों तो उसका घुमाव सदैव पूर्व से दक्षिण, दक्षिण से पश्चिम, पश्चिम से उत्तर और उत्तर से पूर्व की ओर होना चाहिए। सीढ़ियाँ हमेशा विषम संख्या में बनवानी चाहिए। सीढ़ियों के नीचे एवं ऊपर द्वार खुला होना चाहिए।
 तिजोरी- भवन मेंं तिजोरी नगदी आदि सदैव उत्तर दिशा में रखना चाहिए, क्यांकि कुबेर का वास उत्तर दिशा में होता है। तिजोरी में श्रीयंत्र या लक्ष्मी-कुबेर यंत्र भी रखना चाहिए, ऐसा करने पर तिजोरी कभी खाली नहीं होती है।
 तहखाना या तलघर- तहखाने का निर्माण भूखण्ड के पूर्व या उत्तर दिशा की ओर करवाना शुभ तथा अन्य दिशाओं में अशुभकारक होता है। सम्पूर्ण भवन में तलघन नहींं बनवाना चाहिए, यदि तलघर का आकार चूल्हे के आकार त्रिशाल वास्तु आकार का हो तो यह निर्माणकर्ता के लिये कष्टप्रद होता है।
 सेवक कक्ष- वास्तु के अनुसार सेवकों के लिये कक्ष भवन के दक्षिण-पूर्व या उत्तर-पूर्व में होना चाहिए। इसमें सेवक भी प्रसन्नता से रहते हैं। उत्तर एवं दिशा की दीवारों का वजन अद्दिक न हो।
 खिड़कियाँ- भवन में खिड़कियों की संख्या सम होनी चाहिए। पश्चिमी, पूर्वी और उत्तरी दीवारों पर खिड़कियों का निर्माण शुभ होता है। प्रायः द्वार के सामने खिड़कियां होनी चाहिये, ऐसा करने से गृह में सुख-शांति रहती है। खिड़कियों का निर्माण सन्धि का भाग में ऊँचाई कम रखना चाहिए।
 खुला द्वार- भूखण्ड में उत्तर-पूर्व (ईशान) में खुला द्वार रखना चाहिए, दक्षिण व पश्चिम में खुला स्थान कम होना चाहिए। यदि दो मंजिल भवन है तो पूर्व एवं उत्तर दिशा की ओर भवन की ऊँचाई कम होनी चाहिए।
 मुख्य द्वार- वास्तु नियम के अनुसार मुख्य द्वार उत्तर या पूर्व दिशा में हो। दक्षिण एवं पश्चिम में द्वार नहीं होना चाहिए। यदि भूखण्ड पूर्वोन्मुख हो तो मुख्य द्वार ईशान और पूर्व दिशा की ओर बनाना चाहिये। यदि भूखण्ड दक्षिणोन्मुख हो तो मुख्य द्वार आग्नेय और दक्षिण दिशा के मध्य बनाना चाहिये। यदि भूखण्ड पश्चिमोन्मुख हो तो मुख्य द्वार पर नैऋर्त्य और पश्चिम दिशा के मध्य बनाना चाहिये। उत्तरोन्मुख हो तो मुख्य द्वार वायव्य और उत्तर दिशा के मध्य होना चाहिए। दरवाजों की संख्या सम होनी चाहिए। द्वार के सामने सीढ़ी, खम्बा नहीं होना चाहिए।
 भवन में वृक्ष- ऊँचे व घने वृक्ष दक्षिण,पश्चिम भाग में लगाने चाहिए। अन्य वृक्ष किसी भी दिशा में लाभदायक होते हैं।
 भवन की ऊँचाई- भवन की ऊँचाई के लिये भवन की चौड़ाई के 16वें भाग में चार हाथ (16 अँगुल) जोड़कर जितना योग हो, उसके समान ऊँचाई होनी चाहिए। यदि भवन को दो मंजिल या इससे अधिक का निर्माण कराना हो तो पहली ऊँचाई रखनी चाहिए। यही क्रम तीसरी मंजिल के लिये भी होना चाहिये।
 यदि इस क्रम में 4, 3-1/2, 3 हाथ जोड़ा जाय तो ऊँचाई उत्तम, मध्यम, कनिष्ठ तीन प्रकार की होगी। यदि इस क्रम में भी क्रमशः चार हाथ में 26, 21, 16 अंगुल तथा 3-1/2 और तीन हाथ में 26, 21, 15 अंगुल और जोड़ने पर उत्तम, मध्यम, कनिष्ठ ऊँचाई के तीन-तीन भेद हो जायेंगे। इस प्रकार कुल 12 भेद होंगे, इनमें 8वां और 10वां भाग समान होने से 11 भेद हो जायेंगे। भवन में ऊँचाई का निर्णय इस रीति से करना चाहिये। कई विद्वानों के मत में चारों दिशाओं में ऊँचाई समान होनी चाहिये, पूर्वोत्तर में ऊँचा गृह पुत्रनाशक होता है। आठों दिशाओं में भवन के ऊँचे अथवा नीचे होने का परिणाम से जानना चाहिये।

Thursday, February 16, 2017

विद्यारम्भ मुहूर्त

जनवरी (2017)
18 माघ.कृ.06 बुध हस्त में।
29 माघ.शु.02 रवि धनिष्ठा में, घं.13/03 के बाद।
फरवरी (2017)
01 माघ.शु.05 बुध  उ.भा. में।
02 माघ.शु.06 गुरू  रेवती में।
08 माघ.शु.12 बुध  आर्द्रा में।
16 फा.कृ.05 गुरू  चित्रा/स्वाती में,     षष्ठी में।
17 फा.कृ.06 शुक्र  स्वाती में,
   घं.09/26 के पूर्व।
22 फा.कृ.11 बुध  पू.षा. में।
मार्च (2017)
01 फा.शु.03 बुध  रेवती में।
02 फा.शु.04 गुरू  अश्विनी में,
   घं.13/04 के बाद।
08 फा.शु.11 बुध  पुनर्वसु में,
   घं.11/32 के पूर्व।
09 फा.शु.12 गुरू  पुष्य में,
   घं.08/59 के पूर्व।
अप्रैल (2017)
21 वैशाख कृ. 10 शुक्र धनिष्ठा में।
    घं.17 मि.03 के पूर्व।
23 वैशाख कृ. 12 रवि उ.भा. में।
28 वैशाख शु. 02 शुक्र रोहिणी में।
30 वैशाख शु. 05 रवि मृगशिरा/आर्द्रा में।
मई (2017)
01 वैशाख शु. 06 सोम आर्द्रा/ पुनर्वसु में।
05 वैशाख शु. 10 शुक्र पू.फा. में।
    घं.15 मि.40 के पूर्व।
07 वैशाख शु. 12 रवि उ.फा./ हस्त में।
    घं.15 मि.03 के पूर्व।
12 ज्येष्ठ कृ.  01 शुक्र अनुराधा, द्वितीया में।
17 ज्येष्ठ कृ.  06 बुध उ.षा./श्रवण में।       घं.16 मि.34 के पूर्व।
21 ज्येष्ठ कृ.  10 रवि पू.भा. में।
    घं.05 मि.25 के पूर्व।
28 ज्येष्ठ शु.  03 रवि आर्द्रा में।
    घं.10 मि.44 के पूर्व।
जून (2017)
05 ज्येष्ठ शु.  11 सोम चित्रा में।
    घं.09 मि.45 के पूर्व।
11 आषाढ़ कृ. 02 रवि मूल/पू.षा. में।
25 आषाढ शु. 02 रवि पुनर्वसु में।
29 आषाढ शु. 06 गुरू पू.फा. में।
    घं.07 मि.07 के पूर्व।
फरवरी (2018)
09 फाल्गुन कृ. 09 शुक्र अनुराधा में।
    घं.14 मि.36 से
    घं.16 मि. 57 के बीच।
11 फाल्गुन कृ. 11 रवि मूल में।
18 फाल्गुन शु. 03 रवि पू.भा./उ.भा. में।
21 फाल्गुन शु. 06 बुध अश्विनी में।
25 फाल्गुन शु. 10 रवि मृगशिरा/आर्द्रा में।
मार्च (2018)
04 चैत्र कृ.  03 रवि हस्त में।
    घं.13 मि.40 के पूर्व।

अक्षरारम्भ मुहूर्त

जनवरी (2017)
06 पौ.शु.08 शुक्र रेवती में।
09 पौ.शु.12 सोम रोहिणी में।
18 माघ कृ.06 बुध हस्त में,
   घं.12/49 के पूर्व।
19 माघ कृ.07 गुरू चित्रा में।
20 माघ कृ.08 शुक्र स्वाती में, घं.12/35 के पूर्व।
23 माघ कृ.11 सोम अनुराधा में।
30 माघ शु.03 सोम शतभिषा में, घं.11/31 के पूर्व। 
फरवरी (2017)
01 माघ.शु.05 बुध  उ.भा. में।
02 माघ.शु.06 गुरू  रेवती में।
03 माघ.शु.07 शुक्र  अश्विनी में।
06 माघ.शु.10 सोम  रोहिणी में, घं.14/53 के पूर्व।
08 माघ.शु.12 बुध  आर्द्रा/पुनर्वसु में, घं.12/14  बाद।
09 माघ.शु.13 गुरू  पुनर्वसु में,
   घं.09/22 के पूर्व।
13 फा.कृ.03 सोम  उ.फा. में,
 घं.08/59 से घं.16/45 के बीच।
16 फा.कृ.05 गुरू  चित्रा में,
   घं.07/24 के बाद।
17 फा.कृ.06 शुक्र  स्वाती में,
   घं.09/26 के पूर्व।
24 फा.कृ.13 शुक्र  उ.षा./श्रवण   में।
27 फा.शु.01 सोम  शतभिषा में,
   घं.05/50 के पूर्व।    
मार्च (2017)
01 फा.शु.03 बुध  रेवती में।
02 फा.शु.04 गुरू  अश्विनी में,
  घं.13 मि.04 के बाद।
08 फा.शु.11 बुध  पुनर्वसु में,
   घं.11/32 के पूर्व।
09 फा.शु.12 गुरू  पुष्य में,
   घं.08 मि.59 के पूर्व।
13 चै.कृ.01 सोम  उ.फा. में।
15 चै.कृ.03 बुध  चित्रा में,
   घं.10 मि.30 के पूर्व।
23 चै.कृ.10 गुरू  उ.षा. में,
   घं.13 मि.28 के बाद।
24 चै.कृ.11 शुक्र  श्रवण में।
29 चै.शु.02 बुध  रेवती में।
 
मार्च (2017)
29 चैत्र शु.  02 बुध रेवती में।    मई (2017)
01 वैशाख शु. 06 सोम पुनर्वसु में।
12 ज्येष्ठ कृ.  01 शुक्र अनुराधा, द्वि. में।
17 ज्येष्ठ कृ.  06 बुध श्रवण में।
    घं.16 मि.34 के पूर्व।
22 ज्येष्ठ कृ.  11 सोम रेवती में।
29 ज्येष्ठ शु.  04 सोम पुनर्वसु/पुष्य में।
    घं.11 मि.09 के बाद।
जून (2017)
05 ज्येष्ठ शु.  11 सोम चित्रा में।
    घं.09 मि.45 के बाद।
19 आषाढ़ कृ. 10 सोम रेवती में।
    घं.14 मि.22 के पूर्व।
26 आषाढ़ शु. 03 सोम पुष्य में।
जुलाई (2017)
03 आषाढ़ शु. 10 सोम स्वाती में।
फरवरी (2018)
09 फाल्गुन कृ. 09 शुक्र अनुराधा में,       घं.14 मि.36 से
    घं.16 मि. 57 के बीच।
21 फाल्गुन शु. 06 बुध अश्विनी में।

चूड़ाकरण (चौल मुण्डन) मुहूर्त

जनवरी (2017)
19 माघ.कृ.07 गुरू चित्रा में।
30 माघ.शु.03 सोम शतभिषा में।
फरवरी    (2017)
03    माघ.शु.07    शुक्र    अश्विनी    में।
08    माघ.शु.12    बुध    पुनर्वसु    में,    घं.12/14    के    बाद।
09    माघ.शु.13    गुरू    पुनर्वसु    में।
24    फा.कृ.13    शुक्र    श्रवण    में।    
मार्च    (2017)
02    फा.शु.04    गुरू    अश्विनी    में,घं.13/04    के    बाद।
08    फा.शु.11    बुध    पुनर्वसु    में,
    घं.11/32    के    पूर्व।

अप्रैल    (2017)
21    वैशाख    कृ.    10    शुक्र    धनिष्ठा    में,    घं.17    मि.03    के    पूर्व।
22    वैशाख    कृ.    11    शनि    शतभिषा    में,    (वैश्यों    के    लिए)
30    वैशाख    शु.    05    रवि    मृगशिरा    में,    (ब्राह्मणों    के    लिए)
मई    (2017)
02    वैशाख    शु.    07    मंगल    पुष्य    में,    (क्षत्रियों    के    लिए)
08    वैशाख    शु.    13    सोम    हस्त/    चित्रा    में।
13    ज्येष्ठ    कृ.    02    शनि    ज्येष्ठा    में,    (वैश्यों    के    लिए)
16    ज्येष्ठ    कृ.         05    मंगल    उ.षा.    मे,    (क्षत्रियों    के    लिए)
18    ज्येष्ठ    कृ    .07    गुरू    श्रवण/धनिष्ठा    में।
23    ज्येष्ठ    कृ.    12    मंगल    अश्विनी    में,    (क्षत्रियों    के    लिए)
27    ज्येष्ठ    शु.    02    शनि    मृगशिरा    में।
    (वैश्यों    के    लिए)
29    ज्येष्ठ    शु.    04    सोम    पुनर्वसु/पुष्य    में।
    घं.11    मि.09    के    बाद।
30    ज्येष्ठ    शु.    05    मंगल    पुष्य    में।
    (क्षत्रियों    के    लिए)
जून    (2017)
03    ज्येष्ठ    शु.    09    शनि    हस्त    में।
    घं.06    मि.54    के    बाद,    (वैश्यों    के    लिए)    
06    ज्येष्ठ    शु.    12    मंगल    स्वाती    में।    
    घं.11    मि.45    के    बाद,    (क्षत्रियों    के    लिए)
20    आषाढ़    कृ.    11    मंगल    अश्विनी    में।    
    (क्षत्रियों    के    लिए)
25    आषाढ़    शु.    02    रवि    पुनर्वसु    में।
    (ब्राह्मणों    के    लिए)
26    आषाढ़    शु.    03    सोम    पुष्य    में।
जुलाई    (2017)    
03    आषाढ़    शु.    10    सोम    स्वाती    में।    
फरवरी    (2018)
10    फाल्गुन    कृ.    10    शनि    ज्येष्ठा    में।
    घं.14    मि.46    के    बाद,    (वैश्यों    के    लिए)
17    फाल्गुन    शु.    02    शनि    शतभिषा    में।
    (वैश्यों    के    लिए)
20    फाल्गुन    शु.    05    मंगल    रेवती,    अष्विनी    में
    (क्षत्रियों    के    लिए)

25    फाल्गुन    शु.    10    रवि    मृगशिरा    में।
    (ब्राह्मणों    के    लिए)
मार्च    (2018)
04    चैत्र    कृ.    03    रवि    हस्त    में।
    घं.13    मि.40    के    पूर्व,    (ब्राह्मणों    के    लिए)
06    चैत्र    कृ.    05    मंगल    स्वाती    में।
    (क्षत्रियों    के    लिए)
13    चैत्र    कृ.    11    मंगल    श्रवण    में।
    (क्षत्रियों    के    लिए)

नामकरण मुहूर्त

जनवरी (2017)
06 पौ.शु.08  शुक्र रेवती में।
09 पौ.शु.12  सोम रोहिणी में।
18 माघ कृ.06  बुध हस्त में,
    घं.12/49 के पूर्व।
19 माघ कृ.07  गुरू चित्रा में।
20 माघ कृ.08  शुक्र स्वाती में,
    घं.12/35 के पूर्व।
23 माघ कृ.11  सोम अनुराधा में।
30 माघ शु.03  सोम शतभिषा में, घं.11/31 के पूर्व।
फरवरी (2017)
01 माघ.शु.05  बुध उ.भा. में।
02 माघ.शु.06  गुरू रेवती में।
03 माघ.शु.07  शुक्र अश्विनी में।
06 माघ.शु.10  सोम रोहिणी में,घं.14/53 के पूर्व।
08 माघ.शु.12  बुध पुनर्वसु में,
   घं.12/14 के बाद।
09 माघ.शु.13  गुरू पुनर्वसु में,
    घं.09/22 के पूर्व।
13 फा.कृ.03 सोम  उ.फा. में,
 घं.08/59 से घं.16/45 के बीच।
16 फा.कृ.05 गुरू  चित्रा में,
   घं.07/24 के बाद।
17 फा.कृ.06 शुक्र  स्वाती में,
   घं.09/26 के पूर्व।
24 फा.कृ.13 शुक्र  उ.षा./श्रवण में।
27 फा.शु.01 सोम  शतभिषा में,
   घं.05/50 के पूर्व।     
मार्च (2017)
01 फा.शु.03 बुध  रेवती में।
02 फा.शु.04 गुरू  अश्विनी में,
   घं.13 मि.04 के बाद।
08 फा.शु.11 बुध  पुनर्वसु में,
   घं.11/32 के पूर्व।
09 फा.शु.12 गुरू  पुष्य में,
   घं.08 मि.59 के पूर्व।
13 चै.कृ.01 सोम  उ.फा. में।
15 चै.कृ.03 बुध  चित्रा में,
   घं.10 मि.30 के पूर्व।
23 चै.कृ.10 गुरू  उ.षा. में,
   घं.13 मि.28 के बाद।
24 चै.कृ.11 शुक्र  श्रवण में।
29 चै.शु.02 बुध रेवती में।
मार्च (2017)
29 चैत्र शु.   02 बुध रेवती में।
अप्रैल (2017)
05 चैत्र शु.  09 बुध पुष्य दशमी में।
12 वैशाख कृ. 01 बुध चित्रा/स्वाती में।
    घं.09 मि.02 के पूर्व।
19 वैशाख कृ. 08 बुध उ.षा. में।
21 वैशाख कृ. 10 शुक्र धनिष्ठा में।
    घं.17 मि.03 के पूर्व।
24 वैशाख कृ. 13 सोम उ.भा. में।
    घं.07 मि.24 के पूर्व।
28 वैशाख शु. 02 शुक्र रोहिणी में।
मई (2017)
01 वैशाख शु. 06 सोम पुनर्वसु में।
08 वैशाख शु. 13 सोम हस्त/ चित्रा में।
12 ज्येष्ठ कृ.  01 शुक्र अनुराधा, द्वितीया में।
17 ज्येष्ठ कृ.  06 बुध उ.षा./श्रवण में, घं.16 मि.34 के पूर्व।
18 ज्येष्ठ कृ.  07 गुरू श्रवण, धनिष्ठा में।
19 ज्येष्ठ कृ.   08 शुक्र धनिष्ठा, शतभिषा में।
22 ज्येष्ठ कृ.  11 सोम उ.भा./रेवती में।
26 ज्येष्ठ शु.  01 शुक्र रोहिणी में।
29 ज्येष्ठ शु.  04 सोम पुनर्वसु/पुष्य में।
    घं.11 मि.09 के बाद।
जून (2017)
05 ज्येष्ठ शु.  11 सोम चित्रा में।
    घं.09 मि.45 के बाद।
12 आषाढ़ कृ. 03 सोम उ.षा. में।
    घं.10 मि.52 से
    घ्ां.12 मि.21 के बीच।
19 आषाढ़ कृ. 10 सोम रेवती में।
    घं.14 मि.22 के पूर्व।
26 आषाढ़ शु. 03 सोम पुष्य में।
जुलाई (2017)
03 आषाढ़ शु. 10 सोम स्वाती में।
05 आषाढ़ शु. 12 बुध अनुराधा में।
06 आषाढ़ शु. 13 गुरू अनुराधा में।
13 श्रावण कृ.  04 गुरू शतभिषा में।
    घं.14 मि.47 के बाद।
17 श्रावण कृ.  08 सोम अश्विनी में।
20 श्रावण कृ.  12 गुरू रोहिणी में।
21 श्रावण कृ.  13 शुक्र मृगशिरा में।
    घं.12 मि.50 के पूर्व।
24 श्रावण शु.  01 सोम पुष्य में।
27 श्रावण शु.  04 गुरू उ.फा. में।
    घं.07 मि.03 के बाद।
28 श्रावण शु.  05 शुक्र हस्त में।
31 श्रावण शु.  08 सोम स्वाती में।
अगस्त (2017)
02 श्रावण शु.  10 बुध अनुराधा में।
09 भाद्रपद कृ. 02 बुध शतभिषा में।
10 भाद्रपद कृ. 03 गुरू शतभिषा में।
17 भाद्रपद कृ. 10 गुरू मृगशिरा में।
    घं.12 मि.46 के बाद।
23 भाद्रपद शु. 02 बुध उ.फा. में।
24 भाद्रपद शु. 03 गुरू उ.फा. में।
सितम्बर (2017)
04 भाद्रपद शु. 13 सोम श्रवण, धनिष्ठा में।
07 आश्विन कृ. 01 गुरू उ.भा. में।
08 आश्विन कृ. 02 शुक्र उ.भा./रेवती में।
13 आश्विन कृ. 08 बुध मृगशिरा में।
15 आश्विन कृ. 10 शुक्र पुनर्वसु में।
    घं.07 मि.35 के पूर्व।
20 आश्विन कृ. 30 बुध उ.फा. में।
    घं.11 मि.02 के बाद।
21 आश्विन शु. 01 गुरू हस्त में।
22 आश्विन शु. 02 शुक्र चित्रा में।
25 आश्विन शु. 05 सोम अनुराधा में।
अक्टूबर (2017)
02 आश्विन शु. 12 सोम धनिष्ठा में।
    घं.11 मि.46 के पूर्व।
06 कार्तिक कृ. 01 शुक्र रेवती में।
    घं.15 मि.12 के बाद।
09 कार्तिक कृ. 04 सोम रोहिणी में।
    घं.14 मि.19 से
    घं.15 मि.55 के बीच।
नवम्बर (2017)
09 मार्गशीर्ष कृ. 06 गुरू पुनर्वसु/पुष्य में,
    घं.16 मि.44 के पूर्व।
15 मार्गशीर्ष कृ. 12 बुध हस्त/चित्रा में।
23 मार्गशीर्ष शु. 05 गुरू उ.षा. में।
27 मार्गशीर्ष शु. 08 सोम शतभिषा में।
29 मार्गशीर्ष शु. 10 बुध उ.भा. में।
दिसम्बर (2017)
04 पौष कृ.  01 सोम मृगशिरा में।
फरवरी (2018)
07 फाल्गुन कृ. 07 बुध स्वाती में।
    घं.08 मि.47 से
    घं.12 मि.18 के बीच।
08 फाल्गुन कृ. 08 गुरू अनुराधा में।
09 फाल्गुन कृ. 09 शुक्र अनुराधा में,घं.14 मि.36 से घं.16 मि. 57 के बीच।
16 फाल्गुन शु. 01 शुक्र धनिष्ठा/शत. में।
21 फाल्गुन शु. 06 बुध अश्विनी में।
मार्च (2018)
12 चैत्र कृ.  10 सोम उ.षा. में,
    घं.11 मि.16 के बाद।
15 चैत्र कृ.  13 गुरू धनिष्ठा में।

Saturday, February 11, 2017

संवत 2074 सन 2017-18 में केतु का गोचर फल

श्री शुभ सम्वत् 2072 माघ मास कृष्ण पक्ष पंचमी (उदयकालीन), तदुपरान्त माघ मास कृष्ण पक्ष षष्ठी दिन शुक्रवार अंग्रेजी तारीखानुसार 29 जनवरी 2016 को घं.25 मि. 28 पर केतु का प्रवेश अपनी स्वाभाविक वक्र गति से कुम्भ राशि में होगा। तात्कालिक चन्द्रमा उस समय हस्त नक्षत्र, कन्या राशि पर स्थित रहेगा। वर्ष के अन्त तक केतु कुम्भ राशि में रहेगा। जिसका पाद व गोचर फल इस प्रकार है।             
    सन् 2017 में कुम्भ के केतु  का पाद बोधक फल।
01 जनवरी 2017 से 17 अगस्त 2017 तक।
मेष-कन्या-वृश्चिक राशि वालों को स्वर्ण पाद से व्यापार व नौकरी में बढ़ोत्तरी, पर पारिवारिक माहौल असंतुलित रहेगा। मान सम्मान व प्रतिष्ठा में कमी आयेगी, व्यर्थ भ्रमण।
वृष-सिंह-मकर राशि वालों को रजत पाद होने से सफलता मिलेगी, प्रत्येक क्षेत्र में किये प्रयास सफल होंगे, आय के नये स्त्रोत, इष्ट मित्रों का सहयोग, व्यापार में बढ़ोत्तरी होगी।
मिथुन-तुला-कुम्भ राशि वालों को लौह पाद होने से जीवन त्रस्त हो जायेगा, सामाजिक प्रतिष्ठा में कमी, मान-सम्मान व प्रतिष्ठा में कमी, आर्थिक हानि, परिवार में तनाव।
कर्क-मीन-धनु राशि वालों को ताम्रपाद से आगमन, शुभप्रद है प्रगति, लक्ष्मी प्राप्ति, वैभव, सुख-सम्पदा, प्रगति रोजगार आदि में सफल, धर्म-कर्म, सामाजिक कार्य में रूचि।
सन् 2017 में कुम्भ के केतु का गोचर फल।
01 जनवरी 2017 से 17 अगस्त 2017 तक।
    मेष राशि वालों को एकादश केतु शुभ प्रभाव बढ़ाने वाला है। राहु जनित दुष्प्रभावां को कम कर लाभार्जन की स्थिति अनुकूल रहेगी। संतान पक्ष की चिन्ता दूर होगी।
    वृष राशि वालों को दशमस्थ केतु शुभ प्रभावी होने से राहु के शुभ प्रभावां में वृद्धि होगी। बुद्धिचातुर्य से ऐसे काम को भी अंजाम दे पायेंगे जिसकी संभावना नकारात्मक होगी।
    मिथुन राशि वालों को नवम केतु पूज्य है। घर परिवार के दायित्व तो बढ़ेंगे किन्तु उनका सहजता से निर्वाह होगा, वृद्धजनों को तीर्थ यात्रा या विदेश यात्रा करनी पड़ सकती है।
    कर्क राशि वालों को आठवें केतु कष्टप्रद है, आय में प्रगति, व्यापार में समानता नही रहेगी, क्रोध की अधिकता से जीवन कष्टदायी होगा। परिवार में विघटन की स्थितियाँ बनेगी।
    सिंह राशि वालों को सप्तमस्थ केतु पूज्य है। पारिवारिक मनमुटाव, नित्य जीवन में कुछ कठिनाई अवश्य रहेगी। नौकरी व्यापारिक जीविका की सुरक्षा बनी रहेगी।
    कन्या राशि वालों को छठवें केतु शुभ प्रभावी होने से राहुजनित अशुभ प्रभावां को कम करने में सहायक रहेगा, राजकीय सहायता पा सकेंगे। आमदनी के नये स्त्रोत बनेंगे।
    तुला राशि वालों को पंचमस्थ केतु पूज्य है। विशेष प्रयत्नां से आर्थिक लाभ मिलेगा। सामाजिक राजनीतिक लोगां को सफलता के अवसर मिलेंगे। प्रियजनां से सहयोग सम्पर्क बढे़गा।
    वृश्चिक राशि वालां को चतुर्थ केतु अशुभ है। चालू काम धन्धे में बाधक स्थिति उत्पन्न होगी। शरीर कष्ट, मतिभ्रम, अपव्यय, दुर्घटना आदि की सम्भावना रहेगी।
    धनु राशि वालों को तृतीयस्थ केतु शुभ प्रभावी होने से राहु-जनित परेशानियाँ कम होंगी, श्रम संघर्ष के बावजूद रोग, ऋण, शत्रु का भय दूर होगा। भूमि वाहनादि का सुख
    मकर राशि वालों को द्वितीयस्थ केतु पूज्य है। धन पक्ष के प्रति सचेष्ट रहें, अन्यथा असावधानी या दैवीय विपदा से द्दन हानि होगी। वाणी की कठोरता से लोगों से सम्बन्ध कटु होंगे।
    कुम्भ राशि वालों को जन्मस्थ केतु श्रम संघर्ष की शक्ति देकर सफल जीवन का मार्ग प्रशस्त करेगा। धनाभाव, स्वजनां से आन्तरिक पीड़ा, प्रशासनिक अवरोध-विरोध, द्दर्मबल और दैनिक कठिनाइयों से पूर्ण सुरक्षा देगा।
    मीन राशि वालां को द्वादशस्थ केतु अशुभ होगा। इस कारण स्वास्थ्य के प्रति यदा-कदा सचेष्टता आवश्यक होगी। निरर्थक यात्रा करनी पड़ सकती है। विदेश यात्रा का भी योग बनेगा। व्ययाधिक्य, हठवादी प्रवृत्ति बढ़ जायेगी।
सन् 2017 में मकर के केतु का गोचर फल।
17 अगस्त 2017 से सम्वत्सरान्त तक।
    मेष राशि वालों को दशमस्थ केतु शुभ प्रभावी होने से राहु के शुभ प्रभावां में वृद्धि होगी। बुद्धिचातुर्य से ऐसे काम को भी अंजाम दे पायेंगे जिसकी संभावना नकारात्मक होगी।
    वृष राशि वालों को नवम केतु पूज्य है। घर परिवार के दायित्व तो बढ़ेंगे किन्तु उनका सहजता से निर्वाह होगा, वृद्धजनों को तीर्थ यात्रा या विदेश यात्रा करनी पड़ सकती है।
    मिथुन राशि वालों को आठवें केतु कष्टप्रद है, आय में प्रगति, व्यापार में समानता नही रहेगी, क्रोध की अधिकता से जीवन कष्टदायी होगा। परिवार में विघटन की स्थितियाँ बनेगी।
    कर्क राशि वालों को सप्तमस्थ केतु पूज्य है। पारिवारिक मनमुटाव, नित्य जीवन में कुछ कठिनाई अवश्य रहेगी। नौकरी व्यापारिक जीविका की सुरक्षा बनी रहेगी।
    सिंह राशि वालों को छठवें केतु शुभ प्रभावी होने से राहुजनित अशुभ प्रभावां को कम करने में सहायक रहेगा, राजकीय सहायता पा सकेंगे। आमदनी के नये स्त्रोत बनेंगे।
    कन्या राशि वालों को पंचमस्थ केतु पूज्य है। विशेष प्रयत्नां से आर्थिक लाभ मिलेगा। सामाजिक राजनीतिक लोगां को सफलता के अवसर मिलेंगे। प्रियजनां से सहयोग सम्पर्क बढे़गा।
    तुला राशि वालां को चतुर्थ केतु अशुभ है। चालू काम धन्धे में बाधक स्थिति उत्पन्न होगी। शरीर कष्ट, मतिभ्रम, अपव्यय, दुर्घटना आदि की सम्भावना रहेगी।
    वृश्चिक राशि वालों को तृतीयस्थ केतु शुभ प्रभावी होने से राहु-जनित परेशानियाँ कम होंगी, श्रम संघर्ष के बावजूद रोग, ऋण, शत्रु का भय दूर होगा। भूमि वाहनादि का सुख
    धनु राशि वालों को द्वितीयस्थ केतु पूज्य है। धन पक्ष के प्रति सचेष्ट रहें, अन्यथा असावधानी या दैवीय विपदा से द्दन हानि होगी। वाणी की कठोरता से लोगों से सम्बन्ध कटु होंगे।
    मकर राशि वालों को जन्मस्थ केतु श्रम संघर्ष की शक्ति देकर सफल जीवन का मार्ग प्रशस्त करेगा। धनाभाव, स्वजनां से आन्तरिक पीड़ा, प्रशासनिक अवरोध-विरोध, द्दर्मबल और दैनिक कठिनाइयों से पूर्ण सुरक्षा देगा।
    कुम्भ राशि वालां को द्वादशस्थ केतु अशुभ होगा। इस कारण स्वास्थ्य के प्रति यदा-कदा सचेष्टता आवश्यक होगी। निरर्थक यात्रा करनी पड़ सकती है।
    मीन राशि वालों को एकादश केतु शुभ प्रभाव बढ़ाने वाला है। राहु जनित दुष्प्रभावां को कम कर लाभार्जन की स्थिति अनुकूल रहेगी।